‘हनुमान’ की नर्मदा परिक्रमा: शिव से ‘युद्ध’ के बाद साधक बने विक्रम मस्ताल, जानें अभिनेता से वैरागी बनने का सफर
नर्मदापुरम: पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से लड़ने वाले विक्रम मस्ताल नर्मदा की पैदल परिक्रमा यात्रा पर हैं. एक्टिंग, राजनीति और अब अध्यात्म की तरफ मुड़े मस्ताल पैदल परिक्रमा करते हुए मां नर्मदा के तट नर्मदापुरम पहुंचे. उनसे कलाकार से राजनीति और अब आध्यात्म की ओर जाने को लेकर खास बातचीत की. उन्होंने बताया, ”मुंबई में जुहू चौपाटी और स्टार बग में कॉफी पीने वाला में आज संतों के साथ काढ़ा पी रहा हूं, अद्भुत अनुभव है मां नर्मदा के किनारे में.”
नर्मदा परिक्रमा पर विक्रम मस्ताल
मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित बुधनी विधानसभा सीट क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेस से टक्कर देने वाले प्रत्याशी रहे फिल्म अभिनेता विक्रम मस्ताल पैदल नर्मदा परिक्रमा करते हुए नर्मदापुरम पहुंचे. इस दौरान ईटीवी ने उनसे खास बात की. उन्होंने बताया, ”नर्मदा मैया के तट पर बहुत ही अच्छा लग रहा है, बहुत सुकून मिल रहा है, सुखद अनुभूति है. मेरी 42-43 साल की उम्र हो गई है और मां नर्मदा पैदल परिक्रमा के अभी तक 84 दिन पूरे हो चुके हैं. बहुत ही अद्भुत और दुर्लभ अनुभव रहा है.”
अचानक किस्मत ले गई मुंबई
ईटीवी भारत ने उनसे पूछा, आप अभिनेता रहे हैं. हनुमान जी का रोल निभाया है, लोकसभा में शिवराज सिंह चौहान को विधानसभा चुनाव में टक्कर दी, कैसा सफर रहा आपका? इसको लेकर उन्होंने बताया कि, ”मेरी शिक्षा-दीक्षा सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के बांयां गांव में हुई. नर्मदापुरम कॉलेज से पढ़ाई की. उसके बाद मुंबई जाना हुआ. मुंबई जाने की कोई प्लानिंग नहीं थी. वहां कोई सोर्सेस नहीं थे, उस समय व्यवस्थाएं भी नहीं हुआ करती थीं. आर्थिक कमजोरी भी थी, पर भगवान की कृपा ऐसी रही कि पहला सीरियल आंखें मिल गया. उसके बाद रामायण, आश्रम 3 ऐसी ही कई वेब सीरीज करता रहा.”
‘शिवराज सिंह के खिलाफ लड़ना सौभाग्य रहा’
विक्रम मस्ताल ने कहा, ”उसके बाद कमलनाथ जी से मुलाकात हुई. उनका भी सनातन को लेकर अट्रैक्शन ज्यादा रहा है, क्योंकि उन्होंने भी छिंदवाड़ा में बहुत बड़ी हनुमान जी की 101 फिट की मूर्ति बनाई है. मैं कमलनाथ को व्यक्तिगत रूप से पहले से जानता था, तो मुझे सौभाग्य मिला की शिवराज सिंह चौहान के सामने बुधनी से विधानसभा चुनाव लड़ा. क्योंकि शिवराज सिंह मध्य प्रदेश में रोल मॉडल हैं ही. मुझे उनके सामने लड़ने का मौका मिला. इलेक्शन को लेकर काफी एक्साइटेड था, यह बात अलग है कि वह बड़े नेता हैं, इसलिए मेरी जीत नहीं हो पाई, लेकिन अच्छा अनुभव रहा है.
”गुरुजी ने दी नर्मदा परिक्रमा की सलाह
अचानक परिवर्तन नर्मदा परिक्रमा को लेकर उन्होंने कहा कि, ”मैं नर्मदा जी से काफी समय से अटैच रहा हूं. इस पर स्टोरी भी लिख रहा था, कुछ धारावाहिक की स्टोरियां लिख रहा हूं. उसके बारे में भी इलीगल माइनिंग पर धारावाहिक भी तैयार कर रहा हूं. धार्मिक स्टोरी और कथाओं पर भी काम कर रहा था. तभी मेरी मेरे गुरुजी से चर्चा हुई तो गुरुजी ने कहा कि, मां नर्मदा को यदि जानना चाहते हो तो परिक्रमा करना जरूरी है. उन्होंने कहा-वैसे भी दूसरों की किताबों के द्वारा पढ़ा हुआ ज्ञान वह ज्ञान ही होता है, जब स्वयं अनुभव करोगे तो उसका एक अलग-अलग अनुभव होता है.”
विक्रम मस्ताल ने बताया कि, ”बहुत ही अद्भुत 84 दिन आज कंप्लीट हो चुके हैं. इसके बाद ओंकारेश्वर पहुंचना है. आगे अभी 250 से 300 किलोमीटर यात्रा बाकी है. मां नर्मदा जी का अनुभव मतलब आप शब्दों में नहीं कह सकते. लगभग 1330 किलोमीटर की यह यात्रा है. करीब 1130 गांव, बड़े-बड़े शहर पहुंचा. लोगों ने भी खूब सम्मान दिया. मैं एक दिन भी भूखा नहीं रहा, सबने दिन खोलकर खिलाया मुझे.”
शंकराचार्य विवाद पर बोले विक्रम मस्ताल
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि, ”मैंने इस नर्मदा परिक्रमा यात्रा के 84 दिन में कोई राजनीतिक बात नहीं की, इन सबसे दूर रहा हूं. पर मैंने पूर्व में एक वीडियो जरूर जारी किया था, जो घटना घाटी है वह दुर्भाग्यपूर्ण है. ब्राह्मण बच्चों के साथ चोटी पड़कर जिस प्रकार से घसीटा गया, यह हमारी सनातनी रीत नहीं है. मैं पूछता हूं अगर शंकराचार्य दर्शन नहीं करेंगे तो कौन करेगा.
मुझे पता चला कुछ लोग शंकराचार्य के बारे में पूछ रहे हैं कि शंकराचार्य है कि नहीं हैं. यह कौन तय करेगा, कोई राजनीतिज्ञ या कोई ऑफिसर. वह तो शंकराचार्य ही तय करेंगे. हमारा देश सनातनी देश है, शंकराचार्य को इस प्रकार से अपमानित करना बहुत दुर्भाग्य की बात है.”
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.