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Wheat Farming: गेहूं की गभोट अवस्था में करें ये 2 काम, बालियां आएंगी लंबी और दाने बनेंगे चमकदार

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शहडोल: रवि सीजन की फसल में शहडोल में गेहूं सबसे प्रमुख फसलों में से एक है. मतलब सबसे ज्यादा रकबे में इस सीजन में गेहूं की खेती की जाती है. इन दिनों गेहूं की फसल अधिकतर जगहों पर गभोट में है. ऐसे में कुछ आसान उपाय करके किसान गेहूं की बंपर पैदावार ले सकते हैं.

गभोट में गेहूं की फसल में करें उपाय

कृषि वैज्ञानिक डॉ नितिन सिंघई बताते हैं कि “रबी सीजन की सबसे प्रमुख गेहूं की फसल है. इस समय अधिकतर किसानों के खेतों पर गेहूं की फसल गभोट की अवस्था पर आने वाली है, या उस अवस्था में हैं, ये अवस्था पैदावार बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. अगर किसान गेहूं की फसल के इस स्टेज पर ध्यान दें तो निश्चित रूप से वो अपनी पैदावार को बढ़ा सकता है. जब भी कोई फसल अपनी बाली की अवस्था में प्रवेश करती है, गभोट की अवस्था में प्रवेश करती है, उस समय फास्फोरस एवं पोटेशियम नाम के पोषक तत्वों की आवश्यकता ज्यादा मात्रा में होती है.

अब चूंकी किसान डीएपी फर्टिलाइजर, सिंगल सुपर फास्फेट फर्टिलाइजर का उपयोग बुवाई के समय कर चुका होता है, तो हम मिड सीजन में उसकी पूर्ति करने के लिए जल में घुलनशील उर्वरक एनपीके 0:52:34 के नाम से उपलब्ध होता है, ये पानी में बहुत जल्दी घुल जाता है.

कैसे करें उपयोग ?

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि एनपीके 0:52:34 उर्वरक का 1 किग्रा मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से हमको फसल पर छिड़काव करना है. छिड़काव करने के लिए ध्यान रखें हमें 180 लीटर पानी प्रति एकड़ की दर से उपयोग करना है. स्प्रेयर में या छिड़काव यंत्र में जिससे फसल में उर्वरक का छिड़काव करना है. उसमें फ्लैट फैन नोजल लगाकर ही करना है. सामान्य तौर पर किसान फव्वारे का उपयोग करते हैं, फव्वारे का उपयोग करना लाभदायक नहीं होता है. इससे हमारी फसल को सही मात्रा में पोषक तत्व की पूर्ति नहीं हो पाती है. उर्वरक छिड़काव में इनका उपयोग करेंगे तो पोषक तत्वों का पूरा लाभ फसल को मिलेगा.

क्या होगा फायदा ?

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इस एनपीके 0:52:34 उर्वरक का सही समय पर सही मात्रा में उपयोग करने से गेहूं के फसल की बालियों की संख्या, बालियों की लंबाई में वृद्धि होगी, दाने का विकास भी अच्छा होता है. इस उर्वरक में पोटेशियम तत्व जो होता है, वो फसल को गिरने से रोकने में भी मदद करता है.

फसल गिरने से बचाने करें ये उपाय

गेहूं की खेती करने किसानों को सुझाव देते हुए कृषि वैज्ञनिक कहते हैं कि वो सिर्फ यूरिया का उपयोग न करें. यूरिया का ज्यादा मात्रा में उपयोग करने से और जल्दी-जल्दी उपयोग करने से फसल नाजुक होती है, हरापन तो जरूर आपके फसल की बढ़ जाएगी, लेकिन फसल नाजुक हो जाने की वजह से आगे चलकर फसल के गिरने की संभावना बढ़ जाती है. इस स्थिति को टालने के लिए हमारे लिए बहुत अच्छा विकल्प है हम जल में घुलनशील उर्वरक एनपीके 05234 का 1 किग्रा से छिड़काव करें.

जब फसल बाली निकलने के बाद जब दाना भरने की अवस्था आ जाए, उस समय हम इसी जल में घुलनशील उर्वरक 0:0:50 जिसमें सिर्फ पोटेशियम तत्व अकेला होता है, इसका भी हम अगर 1 किग्रा मात्रा छिड़काव करेंगे, तो उससे हमारे दानों में चमक आएगी. दानों का वजन बढ़ेगा और फसल के लुढ़कने की समस्या का भी हम समाधान कर पाएंगे. साथ में कई प्रकार के जो फफूंद जनित जो रोग होते हैं, उनका भी हम रोकथाम कर पाएंगे.

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