MP के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा ‘क्लास-3’ कर्मचारी का दर्जा? हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई, बदल सकती है किस्मत
जबलपुर : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तृतीय वर्ग सरकारी कर्मचारी मानते हुए सभी लाभ प्रदान किए जाने की मांग की गई है. इसे लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए महिला व बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है.
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के शोषण का आरोप
मध्य प्रदेश आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ की महासचिव संगीता श्रीवास्तव की ओर से ये याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता दशकों से राज्य को अपनी सेवाए प्रदान कर रहे हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं का संचालन कर रही हैं. राज्य शासन द्वारा इन कार्यकर्ताओं को शासकीय सेवक की तरह अतिरिक्त कार्यबल के रूप में इस्तेमाल कर उन्हें बी.एल.ओ., जनगणना जैसे अतिरिक्त कर्तव्यों का दायित्व दिया जाता है. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नियमित कैडर सृजित नहीं करते हुए उनका शोषण किया जा रहा है. सरकार इनसे स्थायी कार्य तो ले रही है, लेकिन अधिकार देने से बच रही है. ऐसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नियमित कैडर के सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाओं और लाभों पाने के हकदार हैं.
कार्यकर्ताओं को समान हक और वेतन की मांग
याचिका में राहत चाही गई कि समान काम हेतु समान वेतनमान का हक प्रदान करते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए. उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं जैसे नियमित वेतन, वेतन वृद्धि, अवकाश सुविधाएं, टीए, डी.ए, एच.आर.ए आदि प्रदान की जाए, क्योंकि राज्य शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश के भाग तीन और भाग चार में इन सुविधाओं का आश्वासन दिया गया है. राज्य को उनकी सेवाओं की नियमित आवश्यकता है, लेकिन इन नियमित कैडर सृजित नहीं कर उनका शोषण किया जा रहा है. एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर इसपर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली और अधिवक्ता अहमद साजिद हुसैन ने पक्ष रखा.
मेडिकल कॉलेज में पदोन्नति से क्यों नहीं भरे गए पद?
इसके अलावा एक अन्य मामले में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल में पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों को लेकर याचिका दायर की गई. ये याचिका मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल के द्वारा सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की गई थी. डॉ. डॉक्टर श्वेता ठाकुर, डॉक्टर गायत्री वर्मा व अन्य की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में 40 पद वर्ष 2024 में स्वीकृत हुए थे और उन्हे पदोनत्ति से ही भरे जाने है. एसोसीयट प्रोफ़ेसर के पद पर असिसटेंट प्रोफ़ेसर पर कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति की जा सकती है, लेकिन इसके बजाए सीधी भर्ती निकाल दी गई.
वर्तमान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में लगभग 12 महिलाएं असिसटेंट प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत हैं, जिनके पास आवश्यक योग्यता व अहर्ता हैं. याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से एकलपीठ को बताया कि पदोनत्ति से पद नहीं भरे जाने की स्थिति में सीधी भर्ती कर सकते है. याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि उन्हें पदोन्नति नहीं करने का कोई कारण नहीं बताया गया है. योग्यता के आधार पर पदोन्नति पाने की हकदार है और उनसे कार्य लिया जा रहा है. याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता पंकज दुबे अधिवक्ता अजीत शुक्ल एवं अधिवक्ता सोनाली पांडे ने पक्ष रखा.
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