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Bhopal Meat News: बिना लैब टेस्ट बिक रहा 800 क्विंटल मांस, भोपालियों की सेहत से खिलवाड़; प्रशासन की बड़ी लापरवाही आई सामने

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भोपाल: राजधानी में हर दिन सैकड़ों टन मांस लोगों की प्लेट तक पहुंच रहा है, लेकिन सवाल यह है कि यह मांस कितना सुरक्षित है जब स्लॉटर हाउस बंद है. अवैध स्लाटरिंग वाले जानवरों की जांच की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है और गलियों-मोहल्लों में अवैध कटान खुलेआम चल रही है. तब खतरा सिर्फ कानून का नहीं, जन स्वास्थ्य का बन जाता है. बिना पशु-चिकित्सकीय जांच के कट रहा मांस टीबी, ब्रुसेलोसिस, फूड पॉइजनिंग और त्वचा-पेट की गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है. पशु चिकित्सकों का भी मानना है कि अवैध स्लॉटरिंग शहर को बीमारी के साइलेंट जोन में बदल रही है.

शहर में स्लाटर हाउस बंद, अवैध स्लॉटरिंग जारी

भोपाल के जिंसी स्थित मॉडर्न स्लाटर हाउस से गोमांस सप्लाई होने का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने उसे सील कर दिया है. आसपास पुलिस का पहरा है, लेकिन स्थानीय लोग बताते हैं कि “यहां टीन की चादरों के पीछे स्लॉटरिंग हो रही है.” वहीं शहर के कुछ इलाकों में लोग घरों में स्लाटरिंग कर रहे हैं, जिससे आसपास गंदगी और संक्रमण तो बढ़ ही रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोगों की थालियों तक पहुंचने वाला यह मांस कितना सुरक्षित है, जब स्लाटरिंग से पहले जानवरों की स्वास्थ्य जांच की कोई व्यवस्था ही नहीं है.

प्रतिदिन 800 क्विंटल खपत, 10 हजार को रोजगार

जिंसी में बने स्लाटर हाउस का सबसे पहले कुरैशी समाज ने ही विरोध किया था. भोपाल में बीते 40 सालों से कुरैशी समाज के लोग ही स्लॉटरिंग का काम करते थे. पहले ये अपने जानवर नगर निगम के स्लाटर हाउस में ले जाते थे. वहां स्लॉटरिंग करने के बाद मांस को अपनी दुकानों में बेचते थे, लेकिन जब मॉडर्न स्लाटर हाउस का टेंडर दिया गया, तो कुरैशी समाज के लोगों ने विरोध दर्ज कराया.

कुरैशी समाज के मुब्बशिर कुरैशी ने बताया, “शहर में प्रतिदिन 200 से 250 भैंस-पाड़े जैसे बड़े और करीब 800 से 1000 हजार छोटे जानवर जैसे बकरी-बकरा की स्लाटरिंग होती है. शहर में प्रतिदिन करीब 800 क्विंटल मांस की खपत है. इससे मीट दुकान संचालक, बूचड़खाने में लोडिंग ऑटो चालक और कर्मचारी समेत करीब 10 हजार कुरैशी समाज के लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है.”

शादी समारोह में डिमांड बढ़ी, नगर निगम करे संचालन

कुरैशी समाज के आजम कुरैशी ने बताया, “स्लाटर हाउस बंद होने से सब परेशान हैं. लोगों को मांस कम मिल रहा है, दुकानें बंद हैं. शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है. ऐसे में मांस की काफी डिमांड है.” आजम ने कहा, “केवल लाइव स्टॉक फैक्ट्री को सील किया गया है, स्लाटर हाउस सील नहीं किया गया है. स्लाटर हाउस सील करने की गलतफहमी फैलाई जा रही है. हम नगर निगम से चाहते हैं कि वह स्लाटर हाउस का संचालन करे. स्लाटरिंग का काम समिति को दे दिया जाए, जिस प्रकार हम पहले फार्म लेते थे. उसका जो भी खर्च होता था, वह हम देते थे. वह पैसा भी हम देंगे और हमारी स्लाटरिंग डॉक्टरों द्वारा पास होगी.”

नगर निगम ने झाड़ा पल्ला, नहीं बनाएंगे मांस की मंडी

शहर में भले ही सैकड़ों क्विंटल मांस की खपत है, लेकिन इसकी आपूर्ति कैसे होगी. इसको लेकर सरकारी एजेंसियों ने पल्ला झाड़ लिया है. नगर निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग का कहना है कि “जब प्रशासन ने स्लाटर हाउस को सील कर दिया, तो हमारी जिम्मेदारी खत्म हो गई.” कई सगंठनों का आरोप है कि अभी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में स्लाटरिंग कर रहे हैं. इधर नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि शहर को मांस की मंडी नहीं बनने देंगे. भोपाल में स्लाटर हाउस का संचालन नहीं होगा.

अवैध रूप से स्लॉटरिंग के लग रहे आरोप

नगर निगम ने भले ही स्लाटर हाउस बंद करवा दिया है, लेकिन स्लाटर हाउस के पास टीनशेड लगाकर अवैध रूप से स्लाटरिंग की जा रही है. इस आरोप पर नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा, “स्लाटर हाउस बंद है. वहां भैंसे खड़ी की जा रही हैं, वो मध्य प्रदेश शासन की जमीन है. नगर निगम की नहीं है.” स्लाटर हाउस सील होने के बाद 8 से 10 पुलिसकर्मी वहां तैनात रहते हैं.”

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