भोपाल : राजधानी भोपाल के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कई झोल हैं. शहर में शुरू की गई स्मार्ट साइकिल योजना का दम घुंट गया है. कई स्टैंड पर रखी साइकिलों में जंग लग गई है तो कई जगहों से साइकिलें ही गायब हैं. शहर के अलग-अलग इलाकों में लगे साइकिल स्टैंड इसकी गवाही दे रहे हैं.
कई स्टैंड पर कबाड़ बनी साइकिलें
इन स्मार्ट साइकिलों के लिए शहर के प्रमुख चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर स्टैंड बनाए गए, रखरखाव के अभाव और संचालन में लापरवाही के चलते आज स्थिति यह है कि साइकिलों के टायर पिचक चुके हैं, चैन जाम हो चुकी है और कई साइकिलें पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो रही हैं. कई जगह तो केवल साइकिल स्टैंड बचा, साइकिलें गायब हैं.
योजना पर खर्च हुए 5 करोड़
स्मार्ट साइकिलों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पीपीपी मॉडल पर निजी एजेंसी को दी गई थी, लेकिन न तो समय पर मेंटेनेंस हुआ और न ही खराब साइकिलों को दुरुस्त किया गया. भोपाल के विभिन्न स्टैंड पर 500 साइकिलें आई थीं. इस योजना पर 5 करोड़ रुपये खर्च हुए. ये साइकिलें जीपीएस लैस हैं. कुल 50 स्टेशनों पर स्थापित किया गया.
मकसद था कि नागरिक छोटी दूरी के लिए इनका उपयोग कर सकें और प्रदूषण कम हो सके. यह सेवा शहर के मुख्य क्षेत्रों जैसे न्यू मार्केट, एम.पी. नगर और होशंगाबाद रोड पर शुरू की गई थी और छात्रों सहित कई लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता था.
साइकिल प्रोजेक्ट फेल होने के सवाल पर जिम्मेदार भी अजीब बयान दे रहे हैं. महापौर मालती राय का कहना है “जब स्मार्ट सिटी सीओ आएंगे, तब उनसे चर्चा करके व्यवस्थित किया जाएगा.” नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा “स्मार्ट सिटी द्वारा साइकिल जनता को उपलब्ध कराई गई थी. संबंधित एजेंसी और स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देशित कर उसको व्यवस्थित किया जाएगा.”
इस मामले में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता ज़की ने कहा “स्मार्ट सिटी मिशन ने केवल जनता के पैसों का दुरुपयोग किया है, स्मार्ट सिटी शुरू से ही जनता की गाड़ी कमाई को बर्बाद कर रही है. यह पॉलिसी पैसे खाने के लिए बनाई गई थी.”
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