Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
चंडीगढ़ में सारा अली खान और आयुष्मान खुराना का अंदाज: पंजाबी संस्कृति और खेतों की सैर का उठाया लुत्फ Mandsaur Youth Death Case: सस्ता सोना और विवाद के चक्कर में गई जान, मजिस्ट्रियल जांच के बाद हुआ पोस्... Heart Blockage Symptoms: चलने पर सांस फूलना और सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर हा... Dangerous Building Demolition: कटनी में हादसे का सबब बनी जर्जर अग्रवाल बिल्डिंग पर चला बुलडोजर, मुख्... Veteran Actor Nana Patekar Passes Away: मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन, गोवा ... Gwalior Illegal Colonies: नगर निगम की कार्रवाई होल्ड होने से लोग परेशान, नामांतरण और रजिस्ट्री अटकने... Dehradun Political Update: चुनावी साल में समानांतर यात्राओं पर लगी रोक, कांग्रेस नेताओं की बैठक के ब... Vrindavan Update: प्रेमानंद महाराज के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचने से भक्तों में खुशी, वायर... Gaya Police Action: एसएसबी और पुलिस की बड़ी कार्रवाई, धनगांई थाना क्षेत्र के जंगल से भारी मात्रा में... UP Crime: शादी का झांसा देकर युवती की हत्या और शव छिपाने का मामला, आरोपी लेखपाल जेल भेजा गया

पंजाब की सियासत में हलचल, कांग्रेस ने बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ने का किया ऐलान

29

चंडीगढ़ : पंजाब कांग्रेस के अंदर लंबे समय से चल रही अंदरूनी अनबन एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे से जुड़ा है। पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ताजा बयान ने न सिर्फ अंदरूनी उथल-पुथल को तेज कर दिया है, बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। भूपेश बघेल ने साफ कहा है कि कांग्रेस पार्टी 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव बिना किसी मुख्यमंत्री के चेहरे के लड़ेगी। उनका कहना है कि पार्टी के लिए सबसे बड़ा चेहरा राहुल गांधी हैं और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेगी। यह बयान अपने आप में सियासी तौर पर अहम है क्योंकि इसे पंजाब कांग्रेस के अंदर चल रही महत्वाकांक्षाओं और टकराव पर सीधे तौर पर एक लाइन खींचने के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, पिछले कुछ महीनों से पंजाब कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर लगातार बयानों और इशारों की बौछार हो रही है। कभी कोई नेता खुद को 2027 के लिए तैयार बताता दिखा, तो कभी कोई कहता दिखा कि वह मुख्यमंत्री की रेस में नहीं है। ये सभी बयान खुले दावे नहीं थे, लेकिन यह साफ होता जा रहा था कि पार्टी के अंदर एक अघोषित रेस जरूर चल रही है। इसी बीच नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू का वह बयान, जिसमें मुख्यमंत्री की कुर्सी को ‘500 करोड़ के अटैची केस’ से जोड़ा गया था, पंजाब की राजनीति में भूकंप जैसा साबित हुआ, हालांकि बाद में इस बयान का खंडन किया गया, लेकिन तब तक यह कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई और कांग्रेस में भरोसे के संकट का प्रतीक बन चुका था।

पंजाब कांग्रेस के कई सीनियर नेता, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, लोकसभा सदस्य सुखजिंदर सिंह रंधावा, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और पार्टी अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग शामिल हैं, सभी कभी न कभी 2027 की चर्चा में रहे थे। राजा वड़िंग ने खुद एक बार कहा था कि वह खुद को 2027 के लिए तैयार मानते हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके लिए ड्रग्स और गैंगस्टरिज़्म के खिलाफ लड़ाई कुर्सी से ज़्यादा जरूरी है। यह पूरा माहौल इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि पंजाब कांग्रेस के अंदर न सिर्फ राजनीतिक लड़ाई चल रही थी, बल्कि लीडरशिप को लेकर भी अनिश्चितता थी। ऐसे में भूपेश बघेल का यह ऐलान कि पार्टी बिना मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ेगी, अंदरूनी कलह पर ब्रेक लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.