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दिशोम गुरु की जयंती पर सीएम हेमंत सोरेन का भावुक नमन, कहा- आपसे सीखी सादगी, साहस और जनसेवा

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रांची: आदिवासी अस्मिता के सबसे बुलंद चेहरे, तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन की जयंती पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता को सिर्फ नेता नहीं, जीवन-मार्गदर्शक और संघर्ष की मिसाल बताते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी. सीएम हेमंत सोरेन ने बाबा को सिर्फ एक महान जननेता नहीं, बल्कि ऐसा पिता बताया, जिसने उन्हें जीवन जीने की कला, संघर्ष का साहस और हर परिस्थिति में गरिमा एवं सच्चाई पर अडिग रहना सिखाया. मुख्यमंत्री ने अपने पिता के साथ ली गई कुछ तस्वीरों के जरिए अपने स्मृति को साझा किया है.

मुख्यमंत्री का भावुक संदेश

मुख्यमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा कि उन्होंने बाबा को कई बार थका हुआ देखा, पर टूटा हुआ कभी नहीं देखा और यही अटूट इच्छाशक्ति आज भी उनके भीतर जिंदा है. हेमंत ने दो टूक संदेश दिया कि सत्ता उनके लिए सिर्फ जन-सेवा का माध्यम है और पिता के दिखाए रास्ते और आदर्शों से वह जीवन भर नहीं हटेंगे, चाहे सामने कितनी भी चुनौतियां क्यों न आ जाएं.

जल, जंगल, जमीन की लड़ाई के नायक

शिबू सोरेन को झारखंड और देश भर में जल, जंगल, जमीन की लड़ाई और आदिवासी अस्मिता के सबसे बड़े योद्धा के तौर पर याद किया जाता है.
उन्होंने 1970 के दशक में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर अलग राज्य की मांग को संगठित स्वर दिया और आदिवासी व वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया.

साल 2000 में झारखंड राज्य के गठन के पीछे झामुमो और शिबू सोरेन की आंदोलनकारी भूमिका को निर्णायक माना जाता है, जिसने आंदोलन को सड़क से संसद तक पहुंचाया. राज्य गठन के बाद भी उन्होंने लगातार आदिवासी समाज, किसानों, श्रमिकों और जंगल-पहाड़ में बसे समुदायों की आवाज को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रखने का काम किया.

तीन बार मुख्यमंत्री, आठ बार सांसद

शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर चार दशक से अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने संगठनकर्ता, आंदोलनकारी, सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं. वह झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे. पहली बार 2005 में, फिर 2008 में और तीसरी और आखिरी बार 2009-2010 के बीच. हालांकि गठबंधन की राजनीति के कारण कार्यकाल लंबे समय तक नहीं चल सके.

दुमका से वह आठ बार लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सदस्य भी रहे जबकि केंद्र में उन्हें तीन अलग-अलग कार्यकाल में कोयला मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. जनसभा से लेकर संसद तक उनकी पहचान एक निर्भीक और बेबाक आदिवासी नेता के रूप में रही, जिन्होंने अक्सर राजनीतिक जोखिम उठाते हुए भी अपने समुदाय के पक्ष में आवाज बुलंद की. साल 2025 में 81 वर्ष की आयु में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन हो गया, जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई.

पिता से मिली सीख पर चलने का वादा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संदेश का सबसे मजबूत पक्ष व्यक्तिगत भावनाओं और राजनीतिक विरासत का अनोखा संयोजन है, जो इसे महज औपचारिक श्रद्धांजलि से आगे ले जाता है. उन्होंने माना कि एक बेटे के रूप में उन्होंने पिता से सादगी, मुश्किलों से कभी पीठ न दिखाने का साहस और सत्ता को जनसेवा का माध्यम मानने का संस्कार सीखा, जिसे वह शासन और राजनीति में व्यवहारिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जयंती पर दोहराया कि दिशोम गुरु की अडिग इच्छाशक्ति, संघर्ष की परंपरा और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का जो रास्ता बाबा ने दिखाया, उसी पथ पर चलना उनके जीवन का मूल उद्देश्य रहेगा.

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