Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Solid Waste Rules Raipur News: अब चार श्रेणियों में अलग करना होगा कचरा, नियम तोड़ने पर लगेगा पर्यावर... CRPF 205 Cobra Battalion Jawan: बस्तर में नक्सल ऑपरेशन में दे चुके थे सेवाएं, इलाज के दौरान हुआ निधन... Pundag OP Incharge Bravery: पुंदाग थाना प्रभारी संजीव की सूझबूझ से बची युवक की जान, टावर पर चढ़ने से... Jharkhand Road Accident News: एफसीआई गोदाम के पास भारी वाहनों के आवागमन पर रोक की मांग, रातभर मचा रह... Jharkhand Education News: हिंदी साहित्य सम्मेलन मध्यमा प्रमाणपत्र विवाद पर हाईकोर्ट का निर्णय, 8 हफ्... Palamu Road Jam News: झारखंड आंदोलनकारियों ने सड़क पर लेटकर किया प्रदर्शन, पुलिस बल मौके पर मौजूद, ज... Hemant Soren PMLA Court Update: झारखंड भूमि घोटाला मामला, हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें, आज दोपह... Bihar ICDS Controversy: वाउचर भुगतान और THR के नाम पर अवैध वसूली, सेविका ने पतियों के जरिए बनवाया वी... Vineet Manocha Murder Case: जेल में बंद बेटे सुब्रत को सजा हुई तो किसे मिलेगी प्रापर्टी? बहू शालू और... Latur Crime News: ठाकरे चौक पर छात्रों पर कोयते और दरांती से हमला, ऑटो चालक समेत चार गिरफ्तार, एक ना...

SIR विवाद: बिहार के इनकार के बाद अब बंगाल पर टिकी निगाहें, क्या एडमिट कार्ड को मिलेगी पहचान के रूप में मान्यता?

26

पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया के पहले चरण में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी किए गये हैं और अब जिन मतदाताओं के SIR फॉर्म में गड़बड़ी पाई गई. उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है और सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, लेकिन सुनवाई में कई ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्होंने सेकेंडरी एग्जाम पास नहीं किया है, लेकिन उनके पास एडमिट कार्ड है, जिसमें उनकी जन्मतिथि लिखी है, जो एक वैलिड बर्थ सर्टिफिकेट है.

बंगाल चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग से सिफारिश की है कि एडमिट कार्ड को वैलिड डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता दिया जाएगा. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग इसकी इजाजत देता है, तो यह नियम बंगाल के सभी वोटरों पर लागू होगा.

अधिकारी ने कहा, “हमने चुनाव आयोग से सिफारिश की है कि सेकेंडरी एडमिट कार्ड को एक डॉक्यूमेंट के तौर पर स्वीकार किया जाए. अगर कमीशन हमारी सिफारिश मान लेता है, तो सुनवाई में माध्यमिक एडमिट कार्ड को स्वीकार किया जाएगा.”

क्या बंगाल में सेकेंडरी एग्जाम एडमिट कार्ड होंगे मान्य?

अब तक कमीशन किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड, यूनिवर्सिटी से जारी मैट्रिकुलेशन या एजुकेशनल सर्टिफिकेट को 13 नोटिफाइड डॉक्यूमेंट्स में से एक के तौर पर स्वीकार करता है.

अगर चुनाव आयोग इस प्रपोजल को स्वीकार करता है, तो बंगाल पहला राज्य होगा, जहां माध्यमिक एडमिट कार्ड को वैलिड डॉक्यूमेंट के तौर पर स्वीकार किया जाएगा. बिहार में, बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन परीक्षा के एडमिट कार्ड को वैलिड डॉक्यूमेंट के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया था.

नेशनल इलेक्शन कमीशन ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसके केस की सुनवाई घर पर होगी. हालांकि, आरोप हैं कि कमीशन के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. उन आरोपों के मिलने के बाद कमीशन ने एक्शन लिया. उसने सख्त मैसेज दिया कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो BLO और BLO सुपरवाइजर के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

बंगाल में 27 दिसंबर से शुरू हुई है सुनवाई

SIR की सुनवाई 27 दिसंबर से शुरू हुई है. तृणमूल कांग्रेस बुजुर्गों और बीमार लोगों के सुनवाई सेंटर में आने को लेकर मुखर रही है. उसके बाद, चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि जो लोग बीमारी की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती हैं, प्रेग्नेंट महिलाएं और 85 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को सुनवाई सेंटर नहीं आना होगा.

इसके साथ ही दिव्यांगों को भी सुनवाई सेंटर आने की जरूरत नहीं है. सुनवाई उनके घरों पर होगी. हालांकि, कमीशन ने कहा कि 85 साल से कम उम्र के वोटरों को सुनवाई में आना होगा.

सुनवाई को लेकर चुनाव आयोग के सख्त निर्देश

कमीशन के इस आदेश के बावजूद आरोप लग रहे हैं कि कमीशन के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. बीमार और बुजुर्ग लोगों को सुनवाई सेंटर आने के लिए मजबूर किया जा रहा है और यह शिकायत मिलने के बाद कमीशन ने बताया कि अगर 85 साल से ज्यादा उम्र के किसी भी वोटर, प्रेग्नेंट महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को सुनवाई सेंटर आने के लिए मजबूर किया गया, तो BLO और BLO सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

कमीशन ने यह भी बताया कि ऊपर बताए गए लोगों के मामले में घर पर सुनवाई कब होगी. कमीशन ने कहा कि सुनवाई के समय के आखिरी हफ्ते में 85 साल से ज्यादाउम्र के लोगों, प्रेग्नेंट महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग लोगों के घर पर सुनवाई होगी.

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने यह निर्देश दिया है कि दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों के नाम किसी डॉक्यूमेंट की कमी की वजह से SIR लिस्ट से बाहर न रह जाएं. कई मजदूर लगभग 200 सालों से पीढ़ियों से काम कर रहे हैं. चाय बागानों में मजदूरी और PF से जुड़ी कई तरह की जानकारी होती है. चाय बागान लेबर एक्ट के अनुसार जानकारी को वेरिफाई करने का ऑर्डर जारी किया गया है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.