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“हिमाचल का ‘सीक्रेट’ गांव: जहां रहते हैं सिर्फ दो भाई, पर सुविधाएं ऐसी कि शहर भी फेल!”

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हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में काजा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बसा एक गांव इन दिनों चर्चा में है. यह गांव एक ऊंचे पहाड़ी टीले पर स्थित है. इस गांव का नाम काकती है, जिसमें सिर्फ 6 लोग रहते हैं. गांव अब डिजिटल इंडिया से जुड़ गया है. पिछले साल नवंबर महीने में बीएसएनएल ने इस गांव में 4जी टावर लगाया, जिससे गांव के लोगों के चेहरे खुशी से खिल गए. गांव सिर्फ दो भाइयों का परिवार रहता है. छोटे भाई का नाम कलजंग टाकपा है, जबकि बड़े भाई का नाम छेरिंग नामगयल है जो अपनी पत्नी रिंगजिन यूडन के साथ काकती गांव में रहते हैं.

दो भाइयों के इस गांव में 6 लोग रहते हैं. इनमें एक का बेटा सोनम छोपेल लामा, नवांग ज्ञालसन विशेष बच्चा है व नवांग कुंगा जोकि टैक्सी चलाते है. जानकारों के मुताबिक, यह परिवार अपने वंश की पांचवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा है. काकती गांव राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है. एडीसी काजा शिखा सिमटिया ने बताया कि काकती गांव राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है. यह देश का पहला ऐसा गांव है, जहां केवल एक ही घर है और एक ही परिवार के लोग वर्षों से रह रहे हैं.

सरकार रिकॉर्ड में 15 बीघा जमीन

सरकारी रिकॉर्ड में काकती गांव में कुल 15 बीघा जमीन है. गांव 300 साल पुराने मिट्टी और पत्थरों से बने एक मड हाउस में सिमटा हुआ है. यही घर इस गांव की पहचान भी है और इसकी आबादी भी. मिट्टी और पत्थरों से बना यह पारंपरिक मड हाउस हिमालयी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण भी है. यहां रहने वाले दो भाई अपने पूर्वजों की धरोहर के समेटे हुए हैं.

300 साल पुराना है घर

वहीं पत्थर और मिट्टी से बना मड हाउस गर्मियों में प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में गर्म रखता है. जब बाहर का तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है, तब भी यह घर परिवार को सुरक्षित बना रखता है. छेरिंग ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया कि पहले उन्हें देश दुनिया की खबरें हफ्तों बाद मिलती थीं लेकिन अब मोबाइल के जरिए वह पल-पल की खबर से अपडेट रहते हैं. हालांकि, इन दिनों छेरिंग के सभी बेटे बाहर हैं, पति पत्नी घर में अकेले ही रहते है.

‘शहर बिल्कुल भी पसंद नहीं’

उन्होंने कहा कि हमें शहर बिल्कुल भी पसंद नहीं न ही वहां चकाचौंध पसंद है. जब कभी जाना होता है तो रिवालसर व नैनीताल चले जाते हैं लेकिन वहां भी अधिक दिन नहीं रुकते. अब तो बिजली आ गई है. सड़क घर तक पहुंच गई है लेकिन फिर भी सर्दियों में कठिन दिनों का सामना करना पड़ता है. छह महीने के लिए राशन पानी जमा करते है.

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