बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के बालिका बाल गृह में स्वच्छता, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और भविष्य निर्माण एवं प्रगति से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के पिछड़े और जनजातीय वर्ग की महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करना है.
सीआरपीएफ की कमांडेंट कमल सिसोदिया के नेतृत्व में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ. उन्होंने महिलाओं और युवतियों को सेनेटरी पैड बांटे. मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेनेटरी पैड का नियमित उपयोग न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि इससे आत्मविश्वास और स्वाभिमान भी बढ़ता है.
महिला स्वास्थ्य की अनदेखी समाज के समग्र विकास में सबसे बड़ी बाधा है: कमल सिसोदिया, कमांडेंट, सीआरपीएफ
बच्चों को दी गई सफाई किट
इस कार्यक्रम के जरिए बच्चों को साफ सफाई का महत्व समझाया गया. खास बात ये रही कि बच्चों को एक सफाई किट भी दी गई. इस किट में साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, तौलिया और स्वच्छता से जुड़े अन्य सामान हैं.
बचपन से ही स्वच्छता की आदतें डालने से बीमारियों से बचाव होता है और स्वस्थ समाज की नींव मजबूत होती है: कमल सिसोदिया, कमांडेंट, सीआरपीएफ
शिक्षा, आत्मनिर्भरता और करियर निर्माण पर जोर
इस कार्यक्रम के जरिए जहां महिला स्वास्थ्य एवं विकास पर जोर दिया गया, वहीं महिलाओं को यह भी बताया गया कि उन्हें परिवार का ध्यान तो रखना है, लेकिन समाज की मुख्यधारा से जुड़ना भी जरूरी है. सीआरपीएफ ने बताया कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बच्चे, किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं. उन्होंने पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बलों के साथ ही सरकारी और प्राइवेट जॉब से जुड़ी जानकारी भी दी.
शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन ही महिला सशक्तिकरण की असली कुंजी है: कमल सिसोदिया, कमांडेंट, सीआरपीएफ
सीआरपीएफ का सिविक एक्शन प्रोग्राम
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सीआरपीएफ लगातार सिविक एक्शन प्रोग्राम के जरिए ग्रामीणों से सीधा संवाद करती है. सीआरपीएफ न सिर्फ ग्रामीणों को उनकी बुनियादी जरूरतों का सामान उपलब्ध कराती है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वावलंबन से जुड़ी जानकारी भी देती है.
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