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नक्सल पीड़ित परिवार ने दी आमरण अनशन पर बैठने की धमकी, परिवार ने सुनाई सच्ची कहानी

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रायपुर: केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के सफाए के लिए एंटी नक्सल ऑपरेशन ऑपरेट कर रही है. सरकार की ओर से कहा गया है कि 31 मार्च 2026 तक हम नक्सलवाद का समूल नाश कर देंगे. तय वक्त के भीतर नक्सलियों के खात्मे के लिए फोर्स जंगलों में दिन रात सर्चिंग अभियान चला रही है. दशकों से नक्सलवाद के चलते बस्तर के सभी जिले विकास से अछूते रहे हैं. नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास की रफ्तार वहां बढ़ेगी कोशिशें तेज हैं. दशकों तक नक्सलवाद का दंश झेलने वाले बस्तर के लोग भी चाहते हैं कि इस हिंसा से उनको छुटकारा मिले. नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवार भी शासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

नक्सली हिंसा के पीड़ित परिवार ने दी चेतावनी

नक्सली हिंसा का शिकार एक परिवार मदद और न्याय की आस में रायपुर के चक्कार काट रहा है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि उसको अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. जबकि शासन की ओर से दावा किया गया था कि नक्सली हिंसा के पीड़ितों का पुनर्वास कराया जाएगा. पीड़ित परिवार का कहना है कि शासन के सभी दावे फेल साबित हुए हैं. जिसके बाद वो थक हारकर यहां पर न्याय के लिए पहुंचा है. नक्सली हिंसा से पीड़ित और पुनर्वास की बाट जोह रहे इस परिवार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर उनको न्याय और पुनर्वास का साधन नहीं मिलता, तब निराश होकर आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगे.

शासन से न्याय की मांग

पीड़ित परिवारों का कहना है कि नक्सलियों ने उनके परिजनों को मुखबिर बताकर हत्या कर दी थी. इसके बाद पूरे परिवार को गांव छोड़ने की धमकी दी गई. जान बचाने के लिए परिवारों को अपना घर-गांव सब छोड़ दिया. वो छिपकर दूसरी जगहों पर किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं. पीड़ित परिवार का कहना है कि उनको पुनर्वास सुविधा का लाभ मिलना चाहिए.

पुनर्वास नीति 2025 लागू, फिर भी लाभ से वंचित

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नक्सलवादी आत्मसमर्पण और पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025, 28 मार्च 2025 को लागू की गई, जिसमें नक्सली हिंसा में मारे गए व्यक्तियों के परिवारों को सरकारी नौकरी या 5 लाख की आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान, आवासीय भूमि देने का प्रावधान किया गया है. लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि नीति लागू हुए कई महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक कोई ठोस लाभ नहीं मिला है.

Naxal affected family threatens

फाइलें घूमती रही, फैसला नहीं हुआ

पीड़ितों ने बताया कि जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक और निर्णय के लिए कई बार आवेदन दिए. 24 जून 2025 को सचिव, छत्तीसगढ़ शासन गृह विभाग द्वारा रायपुर कलेक्टर को पत्र भी भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ.

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15 हजार आवास का प्रावधान, फिर भी जमीन नहीं

पुनर्वास नीति में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पीड़ित परिवारों को 15,000 आवास देने का प्रावधान है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि उन्हें न तो जमीन मिली और न ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया.
नेताओं से गुहार, फिर भी नहीं मिली मदद

पीड़ित परिवार ने गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल तक कई बार लिखित आवेदन सौंपे, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. प्रभावितों का कहना है कि राहत और पुनर्वास अब तक कागजों में ही सिमटा है.

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अब आमरण अनशन का ऐलान

नक्सल पीड़ित परिवारों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि जल्द ही उन्हें पुनर्वास नीति का लाभ नहीं दिया गया, तो वे 5 जनवरी 2026 को विधानसभा अध्यक्ष निवास, रायपुर के सामने आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे.
सरकार से सवाल

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नक्सलवाद के खात्मे की बात की जा रही है, तो नक्सल पीड़ितों को उनका हक क्यों नहीं मिल पा रहा? क्या सरकार की पुनर्वास नीति सिर्फ कागजों तक सीमित है? इस सवाल का जवाब सभी नक्सली पीड़ित परिवार अब मांग रहे हैं.

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