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कुलदीप सेंगर केस: FIR से सजा पर रोक तक, पूरी टाइमलाइन समझिए

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बसपा से एक बार, सपा से दो बार और एक बार बीजेपी से विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर को 2017 के उन्नाव रेप केस में बड़ी राहत मिली है. दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक की सजा पर रोक लगा दी है. साथ ही शर्तों के साथ जमानत दी है. इस केस में 16 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को रेप का दोषी ठहराया था. इसके 4 दिन बाद यानी की 20 दिसंबर को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. ये मामला साल 2017 का है, जिसमें 13 अप्रैल 2018 को सेंगर की गिरफ्तारी हुई थी.

इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया कि जून 2017 में उसके साथ रेप किया गया. इसका आरोप उसने कुलदीप सेंगर पर लगाया. जब ये घटना हुई तब कुलदीप बीजेपी के विधायक थे. पीड़िता का आरोप है कि सेंगर ने घर पर बुलाकर उसके साथ रेप किया. साथ ही धमकी भी दी कि शिकायत की तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. इसके साथ ही पीड़िता और उसके परिवार ने आरोप लगाया कि जून 2017 से मार्च 2018 तक कई बार पुलिस से शिकायत की लेकिन एफआईआर तक नहीं दर्ज की गई.

2018 में पीड़िता ने किया दिल्ली का रुख

पीड़िता और उसके परिवार के आरोपों के मुताबिक, स्थानीय थाने से लेकर लखनऊ पुलिस मुख्यालय तक उसने कई चक्कर काटे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद मार्च 2018 में पीड़िता ने दिल्ली का रुख किया, जहां आत्मदाह की चेतावनी दी. मामला सुर्खियों में आया. फिर 8 अप्रैल 2018 को उसने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास के बाहर खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की.

इसके बाद ये मामला देश में सुर्खियों में आया. मामले के तूल पकड़ने पर 8-9 अप्रैल 2018 को इस केस में पहली एफआईआर दर्ज हुई. उधर, इस केस में नया मोड़ तब आया जब 9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की आर्म्स एक्ट केस में गिरफ्तारी हो गई. तब परिवार ने आरोप लगाया कि ये कार्रवाई बदले की भावना से की गई. इसके बाद 9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की हिरासत में पिटाई का मामला सामने आया.

10 अप्रैल 2018 को मौत

ये पिटाई जेल में हुई, जिसमें उसकी हालत गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 10 अप्रैल 2018 को मौत हो गई. अब मामले ने नया मोड़ ले लिया. रेप केस के साथ ही मामला कस्टोडियल डेथ और साजिश का भी बन गया. इसके चलते देश भर में गुस्सा फूटा. लगातार यही सवाल उठता रहा है कि अभी तक कुलदीप की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई.

इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 अप्रैल 2018 को उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा. कोर्ट ने पूछा- क्या विधायक कानून से ऊपर है? इसके एक दिन बाद सीबीआई जांच का आदेश दे दिया. 13 अप्रैल को हाईकोर्ट ने कहा कि सेंगर को तत्काल अरेस्ट किया जाए. इसके बाद 13 13 अप्रैल की रात कुलदीप की गिरफ्तारी हुई.

केस कब क्या हुआ
जून 2017 रेप की घटना
9 महीने तक एफआईआर नहीं
8 अप्रैल 2018 आत्मदाह की कोशिश
9 अप्रैल 2018 एफआईआर और पीड़िता के पिता की गिरफ्तारी
10 अप्रैल 2018 पीड़िता के पिता की मौत
12 अप्रैल 2018 सीबीआई जांच
13 अप्रैल 2018 कुलदीप की गिरफ्तारी
16 दिसंबर 2019 कुलदीप दोषी ठहराए गए
20 दिसंबर 2019 निचली अदालत ने सुनाई उम्र कैद की सजा

अब बात करते हैं कुलदीप के सियासी रसूख की

कुलदीप सेंगर ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी. ये छात्र जीवन था. इसके बाद साल 2002 में पहला विधानसभा चुनाव उन्नाव सदर सीट से लड़ा और जीत दर्ज की. इसके बाद 2007 में जिले की बांगरमंऊ सीट से चुनाव लड़ा. ये चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा था. इसके बाद दोबारा सपा के टिकट पर जिले की ही एक और विधानसभा सीट भगवंतनगर से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की. इसके बाद 2017 में बांगरमऊ विधानसभा से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी. इस तरह विधानसभा सीट कोई हो या पार्टी, कुलदीप को जीत मिलती रही.

पार्टी बदलने पर कुलदीप का जवाब?

जनवरी 2018 के एक इंटरव्यू में कुलदीप ने कहा, कभी व्यक्तिगत हित के लिए मैंने पार्टी नहीं बदली. मेरे साथ विश्वासघात हुआ. 2002 में जब बसपा से विधायक चुना गया तो पार्टी फोरम पर कहा था कि पूरी निष्ठा से काम करूंगा. 2007 में चुनाव से पहले पार्टी से निकाला गया. इसके बाद नसीमुद्दीन सिद्दिकी ने मुझे बुलाया और कहा कि पार्टी सुप्रीमो चाहती हैं कि पार्टी में आ जाइए, आपको उपकृत किया जाए लेकिन मैनें कभी अपने लिए पद या पैसे की इच्छा नहीं की. मैंने हरदम किसानों, गरीबों और युवाओं की बात उठाई है. जहां इन मूल्यों के लिए जगह नहीं, मुझे वहां रहना पसंद नहीं.

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