सोनीपत : अगर आप भी अपने और अपने परिजनों की किसी भी लैब से कोई जांच करवाई है तो आप सावधान हो जाओ, एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप दंग रह जाओगे।
जांच में रिपोर्ट मिली फर्जी
मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने पुलिस को शिकायत दी कि उनकी दस वर्षीय बेटी ग्रोथ हार्मोन की कमी से पीडि़त है, जिसके उपचार के दौरान नियमित रूप से इंसुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर (आईजीएफ) -1 जांच कराई जाती थी। यह जांच रिपोर्ट इलाज में अहम होती है। वह तीन-चार वर्ष से टीडीआई रोड स्थित लेबेक्स पैथोलॉजी लैब से डॉ.राजेश के पास अपनी बेटी के टेस्ट करा रहे थे। लैब का संचालक राजेश खुद को चिकित्सक बताता था, जिस कारण उस पर पूरा भरोसा हो गया था। उसी लैब से मिली रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक इलाज करता रहा और दवाइयों की खुराक घटाता-बढ़ाता रहा। समय बीतने के बावजूद जब बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ और उसके शरीर में अन्य समस्याएं उभरने लगीं तो उन्हें रिपोर्ट पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने उन्हीं जांच रिपोर्ट को एक प्रतिष्ठित निजी लैब में सत्यापन के लिए भेजा। जांच में पता लगा कि रिपोर्ट फर्जी थीं।
शिकायतकर्ता के अनुसार कई वर्ष से उनकी बेटी का इलाज जाली मेडिकल रिपोर्टों के आधार पर किया जा रहा था, जिससे उसके स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा। इस खुलासे के बाद पीडि़त पिता ने कुंडली थाना पुलिस को शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
वहीं थाना कुंडली प्रभारी इंस्पेक्टर सेठी मलिक ने बताया कि टीडीआई के रहने वाले एक शख़्स ने बताया कि टीडीआई रोड पर स्थित एक पैथ लैब में उसने अपनी बेटी का टेस्ट कराया था और लैब संचालक राजेश ने उसकी फर्जी रिपोर्ट्स तैयार करके उसकी बेटी का फर्जी तरीके से इलाज किया गया जिसके चलते उसकी बेटी की जान भी जा सकती थी और उसके बाद उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
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