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अबूझमाड़ में सीआरएमसी सालभर से पेंडिंग रखने का आरोप, डॉक्टरों ने किया ओपीडी बहिष्कार, मरीज बोले कहां कराए इलाज

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नारायणपुर: बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई है. जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित सब हेल्थ सेंटर में मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है. बस्तर संभाग के सभी जिलों में डॉक्टरों ने ओपीडी बहिष्कार कर दिया है.

ओपीडी बहिष्कार क्यों ?

CRMC (नक्सल क्षेत्र प्रोत्साहन राशि) भुगतान को लेकर जारी असंतोष के बीच नारायणपुर सहित दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और बस्तर (जगदलपुर) जिले में जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सब-हेल्थ सेंटर (SHC) तक OPD सेवाएं प्रभावित हो रहीं है. डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों, RMA और ANM ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लंबित प्रोत्साहन राशि के तत्काल भुगतान की मांग की. डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के चलते सोमवार को सामूहिक विरोध के चलते नारायणपुर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की OPD सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

सालभर से CRMC पेंडिंग रखने का आरोप

स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि वे बीते 12 महीनों से लगातार आश्वासन के भरोसे धैर्य बनाए हुए थे. कई बार शासन-प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ, जिससे उन्हें यह कठोर निर्णय लेना पड़ा.हड़ताली मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि पिछले 12 महीनों से CRMC पूरे बस्तर संभाग में नहीं दिया जा रहा है. इसके लिए हमने स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बताया गया. पिछले 5 दिसंबर से शाम की ओपीडी भी बंद रखी गई.

CRMC की मांग को लेकर सितंबर के महीने में हमने नक्सलियों का पोस्टमॉर्टम भी रोका. बावजूद इसके हमें सीआरएमसी नहीं दिया जा रहा है- -हिमांशु सिन्हा, हड़ताली मेडिकल ऑफिसर

अस्पताल में बीमार मरीज परेशान

OPD बंद रहने के कारण आदिवासी अंचलों और ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ा. कई मरीजों और उनके परिजनों ने नाराजगी जताई.

पर्ची कटाने के बाद कई घंटे इंतजार किया. बाद में पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर है. जिला अस्पताल में मरीज काफी परेशान हो रहे हैं –अतुल सिंह, मरीज

डॉक्टर हड़ताल पर है, किसको दिखाऊं -ग्रामीण मरीज

आपातकालीन सेवाएं भी बंद करने की चेतावनी

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जीवन-रक्षक सेवाएं प्रभावित नहीं की गई हैं, लेकिन यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है. इसमें आपातकालीन सेवाएं, MLC एवं पोस्टमार्टम कार्यों से संबंधित निर्णय भी शामिल हो सकते हैं. नारायणपुर के जिला अस्पताल में कुल 6 डाक्टर ओपीडी में अपनी सेवा अभी दे रहें हैं. जिससे कुछ हद तक मरीजों को इस हड़ताल के बावजूद थोड़ी राहत है.

CRMC भुगतान में हो रही देरी ने बस्तर संभाग की पहले से संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था को संकट में डाल दिया है. एक ओर स्वास्थ्यकर्मी अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर आम जनता इलाज के लिए भटकने को मजबूर है.

सीआरएमसी (CRMC) क्या है ?

CRMC यानी Chhattisgarh Rural Medical Core एक विशेष प्रोत्साहन योजना है. इसके तहत दुर्गम, नक्सल प्रभावित, कठिन और पहुंचविहीन क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है. इस योजना का उद्देश्य दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल बढ़ाना है.

किस अस्पताल/संस्थान के कर्मचारियों को राशि दी जाती है?

CRMC के अंतर्गत दुर्गम या नक्सल प्रभावित क्षेत्र के चिकित्सा केंद्र में काम करने वाले डॉक्टर, स्टाफ नर्स, RMA, ANM और अन्य स्वास्थ्यकर्मी इस योजना के पात्र होते हैं. इनमें जिला अस्पताल से लेकर सब हेल्थ सेंटर के स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैं.

• जिला अस्पताल

• सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)

• प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)

• सब-हेल्थ सेंटर (SHC)

इसके तहत कितनी राशि दी जाती है?

पद और काम के मुताबिक CRMC राशि दी जाती है.

• डॉक्टर: ₹25,000 से ₹30,000 प्रति माह (औसतन)

• स्टाफ नर्स / RMA : ₹3,000 से ₹5,000 प्रति माह

• ANM एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी : ₹2,000 से ₹4,000 प्रति माह

(नोट: वास्तविक राशि क्षेत्र की श्रेणी एवं शासन आदेश के अनुसार भिन्न हो सकती है)

यह भुगतान कब से लंबित है?

बस्तर संभाग सहित कई नक्सल प्रभावित जिलों में CRMC भुगतान जनवरी 2025 से लंबित है. 11–12 माह का भुगतान अब तक नहीं किया गया है.

यह भुगतान क्यों लंबित है?

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा CRMC मद की राशि राज्य सरकार को जारी की जा चुकी है. राज्य स्तर पर बजटीय स्वीकृति एवं भुगतान आदेश जारी नहीं किए गए. विभागीय प्रक्रियाओं और प्रशासनिक देरी के कारण भुगतान अटका हुआ है. अब इस देरी का खामियाजा स्वास्थ्यकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है.

CRMC कब से दिया जा रहा है?

CRMC योजना की शुरुआत साल 2012 में हुई है. यह योजना लगातार लागू रही और नियमित रूप से भुगतान किया जाता रहा है. यह पहली बार है जब करीब 12 महीने से भुगतान अटका है.

कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?

• जनवरी 2025 से लंबित सभी CRMC राशि का तत्काल भुगतान.

• भविष्य में CRMC भुगतान को नियमित और समयबद्ध किया जाए.

• दुर्गम एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत कर्मियों का मनोबल बना रहे.

स्वास्थ्यकर्मियों ने स्पष्ट किया है कि लंबित भुगतान होते ही वे आंदोलन समाप्त कर देंगे और जनहित में पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं पूर्ण रूप से देंगे.

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