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कोपरा जलाशय को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, विदेशी पक्षियों का बना आरामगाह

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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ को वैश्विक मंच पर कोपरा जलाशय ने नई पहचान दी है. बिलासपुर जिले के सकरी गांव स्थित कोपरा जलाशय को छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया है. यह उपलब्धि न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है. बिलासपुर शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित कोपरा जलाशय अब छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है.

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने दी बधाई

कोपरा जलाशय को रामसर साइट घोषित किए जाने के बाद पूरे प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है. इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता से जलाशय की वैश्विक महत्ता के साथ-साथ इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ गई है. वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय की विशिष्ट पारिस्थितिकी, समृद्ध जल-परितंत्र और स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की विविधता के कारण इसे यह सम्मान प्राप्त हुआ है. यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है.

किन्हें मिलता है रामसर का दर्जा
रामसर दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है, जो जैवविविधता,जल-संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण होती हैं.बिलासपुर के कोपरा जलाशय प्रवासी पक्षियों के लिए एक स्वर्ग है अब यह उनका आदर्श बसेरा बन चुका है. हर साल सर्दियों में देश-विदेश से हजारों पक्षी यहां आते हैं.यहां करीब 122 प्रजातियों के पक्षी देखे जाते हैं, जिनमें कई दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं. मार्च के अंत तक पक्षी यहां प्रवास करते हैं.

ग्रामीण सुरेश कुमार यादव का कहना है कि यहां बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं. हम सब गाव वाले खुद पक्षियों की सुरक्षा करते हैं और शिकारियों को गांव में घुसने नहीं देते. यही कारण है कि पक्षी हजारों किलोमीटर दूर से इस सुरक्षित जगह पर आते हैं.

वन विभाग और शासन प्रशासन से हम यही मांग करते हैं कि यहां इस जगह पर बड़े रूप में वृक्षारोपण कराया जाए, ताकि वातावरण पक्षियों के अनुकूल रहे और उन्हे रहने के लिए एक छायादार वृक्ष भी मिले – सुरेश,ग्रामीण

वही वेटलैंड मित्र हरीश निर्मलकर ने बताया कि पिछले कुछ साल से वो रामसर से जुड़े हैं, उनकी टीम के हेड और अन्य साथी मिलकर ग्रामीणों को जागरूक करते रहते हैं. साथ ही पक्षी संरक्षण का काम किया जा रहा है.

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

आपको बता दें कि वन विभाग ने कुछ साल पहले कोपरा जलाशय में पक्षी संरक्षण और जागरकता के लिए पक्षी महोत्सव का आयोजन किया था, जिसमें पक्षी प्रेमियों,स्थानीय युवाओं और पर्यटकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस पहल से क्षेत्र में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी है.पक्षी महोत्सव और बढ़ते पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी साथ ही स्थानीय युवाओं को टूर गाइड के रूप में रोजगार मिलेगा.साथ ही स्थानीय खानपान व्यंजनों को भी नई पहचान मिलेगी है. कोपरा जलाशय अब बिलासपुर के साथ छत्तीसगढ़ का गौरव बन चुका है.

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