दमोह: किशुनगंज ग्राम में अरंडी के बीज खाने से करीब चार दर्जन बच्चे बीमार हो गए. उन्हें तत्काल ही जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया. कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को बेहतर उपचार के निर्देश दिए हैं तो वहीं क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री लखन पटेल ने आवश्यक निर्देश दिए हैं.
बच्चे उल्टी, दस्त और बेहोशी का शिकार
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर पथरिया विधानसभा विधानसभा में आने वाले ग्राम किशुनगंज में मंगलवा शाम उस समय हड़कंप मच गया जब एक एक के बाद एक बच्चे उल्टी, दस्त और बेहोशी का शिकार होने लगे. देखते ही देखते यह संख्या एक दर्जन से करीब चार दर्जन तक पहुंच गई. जैसे ही परिजनों को आभास हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है उन्होंने तत्काल ही मामले की सूचना पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग को दी. बच्चों को किसी तरह जिला अस्पताल लेकर आए. यहां पर एक के बाद एक करीब 45 बच्चों को भर्ती कराया गया. जहां पता चला की बच्चों ने अरंडी के बीज खाए हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने कराई गांव में मुनादी
उधर, मामले की जानकारी लगते ही कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने शीघ्र ही अस्पताल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य विभाग को बेहतर से बेहतर उपचार करने के निर्देश दिए. साथ ही दमोह अनुविभागीय अधिकारी आरएल बागरी को जिला अस्पताल भेजा. इस घटना के बाद एकदम से स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया एवं एक टीम किशुनगंज भी पहुंच गई. वहां पर डायल 112 की मदद से पूरे गांव में मुनादी कराई गई की जो भी बच्चे किसी भी तरह से भले ही वह आंशिक रूप से पीड़ित हो उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाए या किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति में तुरंत ही स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे.
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि, ”गांव में अरंडी के बीज सामूहिक रूप से बच्चों के द्वारा खा लिए जाने का मामला सामने आया है. स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता से उपचार करने की निर्देश दिए गए हैं. किसी भी तरह की कोई कोताही न बरती जाए. जिला प्रशासन पीड़ितों के साथ खड़ा है.”
मंत्री लखन पटेल ने दी जानकारी
उधर, घटना की जानकारी लगते ही पथरिया विधायक एवं प्रदेश के पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने जानकारी साझा की है. उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, ”पथरिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम किशुनगंज में बच्चों के अज्ञात पदार्थ खाने से उल्टी और दस्त की घटना की जानकारी मिलने पर तुरंत प्रशासन को निर्देशित किया है. सभी बच्चों को जिला अस्पताल लाया गया है.
मैं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संपर्क में हूं और सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए. बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.”
पीड़ितों के परिजन एवं पीड़ित बच्चे अभी यह बता पाने की स्थिति में नहीं है कि उन्हें सामूहिक रूप से अरंडी के बीज कैसे प्राप्त हुए और उन्होंने क्यों खा लिए. यह गंभीर एवं जांच का विषय है कि किसी गांव में एक दो नहीं बल्कि करीब चार दर्जन से अधिक बच्चे एक साथ इस हाल में अस्पताल पहुंचे हो.
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