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सर्दियां आते ही छा जाती है ये खास रम! 170 साल से है इसका दबदबा, शराब प्रेमियों की फेवरेट, क्या है इसकी खासियत?

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देश में सर्दियां शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में लोगों का रुझान व्हिस्की से ज्यादा रम की ओर झुक जाता है. जिसकी वजह से रम की खपत भी साल के बाकी महीनों के मुकाबले में सर्दियों के कुछ महीनों में ज्यादा होती है. ऐसा नहीं कि रम सिर्फ सर्दियों में ही पी जाती है. देश में कई लोग ऐसे भी हैं कि जो गर्मी और बरसात के महीनों में भी इसका लुत्फ लेते हैं, लेकिन जो लोग पूरे साल रम नहीं पीते हैं, वो भी सर्दियों में रम का सेवन करने में हिचकिचाते नहीं है. आज हम ऐसे ही रम की बात कर रहे हैं, जो देश में 170 साल से बिक रही है, जिसकी बादशाहत देश में आज भी कायम है. इस रम का नाम है ओल्ड मोंक. जोकि शुरू से भारत में ही तैयार ही जाती है और पूरी तरह से भारतीय है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ओल्ड मोंक की शुरुआत कब हुई और हर साल इस रम की कितनी खपत होती है और कितना रेवेन्यू जेनरेट करती है.

कब शुरू हुई थी ओल्ड मोंक की शुरुआत?

1855 में, एडवर्ड डायर ने सस्ती बीयर की ब्रिटिश ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश के कसौली में एक शराब की भट्टी स्थापित की. इस शराब की भट्टी का स्वामित्व बदलता गया और अंततः मोहन मीकिन प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक डिस्टिलरी बन गई. ओल्ड मॉन्क, जो कथित तौर पर मोहन मीकिन के पूर्व प्रबंध निदेशक वेद रतन मोहन द्वारा निर्मित है, भारत में पहली बार 1960 के दशक में पेश किया गया था. कपिल मोहन के भाई कर्नल वेद मोहन, बेनेडिक्टिन मोंक्स के शांत जीवन और पहाड़ों में तपस्वी जीवन जीते हुए उनके द्वारा बनाए गए पेय पदार्थों से प्रेरित थे, जहां वे शांति से रहते थे. इसीलिए, इस इसका नाम मोंक रखा गया. ओल्ड मॉन्क से पहले, हरक्यूलिस रम (जो अभी भी बिकती है) थी जो विशेष रूप से सशस्त्र बलों के लिए तैयार की जाती थी. स्वाद और शायद हरक्यूलिस से भी बेहतर क्वालिटी वाला यह ब्रांड जल्द ही दुनिया के अग्रणी डार्क रम में से एक और शायद देश का सबसे लोकप्रिय आईएमएफएल ब्रांड बन गया.

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ओल्ड मोंक रम एक वैटेड भारतीय डार्क रम है, जिसे 1855 में लॉन्च किया गया था. यह एक विशिष्ट वनीला स्वाद वाली डार्क रम है, जिसमें 42.8 फीसदी अल्कोहल होता है. इसका प्रोडक्शन गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में होता है और इसका रजिस्ट्रेशन सोलन, हिमाचल प्रदेश में है. इसका कोई विज्ञापन नहीं है, इसकी लोकप्रियता वर्ड ऑफ माउथ और ग्राहकों की वफादारी पर निर्भर है. 2013 में ओल्ड मोंक ने मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन रम के हाथों सबसे ज़्यादा बिकने वाली डार्क रम का अपना दर्जा खो दिया.ओल्ड मोंक कई वर्षों से सबसे बड़ा भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) ब्रांड रहा है.

इम्पैक्ट इंटरनेशनल की 2008 की “रिटेल प्राइस पर टॉप 100 ब्रांड्स” की सूची में ओल्ड मोंक को भारतीय स्पिरिट ब्रांडों में 5वां स्थान मिला था, जिसका खुदरा मूल्य 240 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. यह छह साइज में 90 मिली, 180 मिली, 375 मिली, 500 मिली, 750 मिली और 1 लीटर की बोतलों में उपलब्ध है. ओल्ड मोंक को 1982 से मोंडे सेलेक्शन्स में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाता रहा है.

ओल्ड मोंक का प्रॉफिट ओर रेवेन्यू

अगर बात ओल्ड मोंक के प्रॉफिट और रेवेन्यू की बात करें तो लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025 में पेरेंट कंपनी मोहन मीकिन लिमिटेड का कुल रेवेन्यू 2,166.5 करोड़ रुपए था. तबकि कंपनी का नेट प्रॉफिट लगभग 102.6 करोड़ रुपए देखने को मिला था. जानकारी के अनुसार कंपनी के नेट प्रॉफिट में 21 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली थी. जबकि रेवेन्यू में 11.6 फीसदी का इजाफा देखने को मिली था. वहीं प्रॉफिट बिफोर टैक्स का आंकड़ा 138.19 करोड़ रुपए देखा गया था. अगर बात कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन की करें तो 4.79 फीसदी देखा गया था. जो कि आने वाले सालों में और भी ज्यादा देखने को मिल सकता है.

सेल्स में हो रहा है इजाफा

ईटी ब्रांडइक्विटी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में, ओल्ड मोंक ने 1.3 करोड़ केस बेचे, जो मैकडॉवेल्स सेलिब्रेशन जैसी प्रतिस्पर्धियों से कहीं बेहतर था. रिपोर्ट में इस बढ़ोतरी का कारण बताते हुए कहा कि इस पुनरुत्थान का श्रेय बेहतर मैन्युफैक्चरिंग, थर्ड पार्टी डिस्ट्रीब्यूशंस से कंट्रोल वापस पाकर बेहतर उपलब्धता और मजबूत कंज्यूमर डिमांड है. खास बात तो ये है कि इसके रेवेन्यू में काफी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. वित्त वर्ष 18 और वित्त वर्ष 24 के बीच कंपनी की सेल्स तिगुनी होकर 2,166 करोड़ रुपए हो गई और मुनाफा बढ़कर 103 करोड़ रुपए हो गया.

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