Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Karan Johar Spy Movie: करण जौहर बनाएंगे RAW के पहले चीफ RN काव की बायोपिक, 2028 में होगी रिलीज Sri Lanka Water Shortage News: नदियां और कुएं सूखे, पीने के पानी के लिए तरसे लोग; अल नीनो बना बड़ी व... Gold Loan Demand in India: मजबूरी नहीं बल्कि स्मार्ट चॉइस बना गोल्ड लोन, युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ... Sanchar Saathi Portal Alert: साइबर क्राइम और फर्जीवाड़े से बचने के लिए तुरंत चेक करें अपने नाम पर रज... Mahalakshmi Vrat Rules: 16 दिनों तक चलने वाला महालक्ष्मी व्रत किसे करना चाहिए और किसे नहीं? जानिए नि... Weekend Sleep Myth: वीकेंड पर 12 घंटे सोने से पूरी नहीं होती नींद, जानिए क्यों खतरनाक है स्लीपिंग पै... Delhi High Court News: केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद नए जजों की नियुक्ति, जानिए किन-किन चेहरों को मि... DTC Bus Vandalism Delhi: डीटीसी बस हड़ताल के दौरान तोड़फोड़ और हिंसा मामले में 12 गिरफ्तार, साजिशकर्... Delhi Prison Crime News: अति-सुरक्षित रोहिणी जेल के वार्ड 3 में खूनी संघर्ष, आर्म्स एक्ट के बंदी की ... Vidisha News: गांवों को गरीबी मुक्त बनाने के लिए शिवराज सिंह चौहान की बड़ी पहल; विदिशा से 'जिला समृद...

स्मॉग ने छीनी बच्चों-बुजुर्गों की साँसें! दिल्ली-NCR में खतरनाक स्मॉग से बढ़ रहा अस्थमा, हवा में जहर

22

दिल्ली-NCR में पिछले कुछ समय से प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक स्थिति में बना हुआ है. हवा में धूल, धुआं, PM2.5 और PM10 जैसे कण तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सामान्य व्यक्ति की भी सांसें भारी कर देते हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों को हो रहा हैं. लगातार स्मॉग के संपर्क से खांसी, आंखों में जलन, सांस में रुकावट और सीने में जकड़न जैसे लक्षण तेजी से बढ़ते दिख रहे हैं. ऐसे में अस्थमा की समस्या भी बढ़ रही है.

प्रदूषण के महीन कण सीधे फेफड़ों में जाकर सूजन पैदा करते हैं, जिससे एयरवे संकुचित हो जाते हैं. यही स्थिति अस्थमा को ट्रिगर करती है या पहले से मौजूद अस्थमा को गंभीर बना देती है. बच्चों के फेफड़े अभी पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए जहरीली हवा उन्हें जल्दी नुकसान पहुंचाती है. वहीं बुजुर्गों में पहले से मौजूद सांस और दिल की समस्याएं प्रदूषण के कारण और बिगड़ जाती हैं. इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार खांसी आना, सीने में भारीपन, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज़, तेजी से सांस चलना, बार-बार थकान महसूस होना और रात में सांस फूलना शामिल हैं. कुछ लोगों में आंखों में जलन और गले में खराश भी दिखाई देती है. यह सभी संकेत बताते हैं कि प्रदूषण का असर सीधे फेफड़ों पर हो रहा है.

बढ़ते प्रदूषण में बच्चों और बुजुर्गों को अस्थमा से कैसे बचाएं?

आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डॉ. सुभाष गिरी बताते हैं कि प्रदूषण के उच्च स्तर के समय में बच्चों और बुजुर्गों को जितना हो सके घर के भीतर ही रखें, खासकर सुबह और शाम के समय जब AQI सबसे खराब होता है. घर में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें और कमरों को धूल-मुक्त रखें. बाहर निकलना जरूरी हो तो N95 या N99 मास्क पहनाना सबसे जरूरी कदम है.

पानी पर्याप्त मात्रा में पिलाएं ताकि शरीर में नमी बनी रहे और सूजन कम हो. अगर अस्थमा के लक्षण दिखें, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए इनहेलर नियमित रूप से लें और दवाइयों की डोज़ अपने आप न बदलें. ठंडी हवा से बचाने के लिए बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनाएं. दिन में भाप लेना, हल्की एक्सरसाइज और घर का ताजा खाना फेफड़ों को राहत देता है. हालात खराब हों या सांस लेने में कठिनाई बने, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

यह भी जरूरी

AQI चेक करके ही बाहर निकलें.

स्कूल जाने वाले बच्चों को मास्क पहनाएं.

अस्थमा के मरीजों के लिए इनहेलर हमेशा साथ रखें.

घर में वेंटिलेशन अच्छा रखें, पर धुआं या धूल न आने दें.

पौधे जैसे स्नेक प्लांट और एलोवेरा घर की हवा सुधारते हैं.

स्मॉग के दिनों में किसी भी तरह की स्ट्रेन वाली एक्सरसाइज से बचें.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.