Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

2005 से तैनात Teachers को पक्का करने के आदेश जारी! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

12

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के सर्व शिक्षा अभियान (एस.एस.ए) के तहत 2005 से काम कर रहे शिक्षकों को रेगुलर करने का रास्ता साफ़ कर दिया है। जस्टिस जगमोहन बांसल की एकल पीठ ने सात याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कहा कि ये शिक्षक “बकडोर एंट्री” वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि इनकी भर्ती विज्ञापन, लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, पुलिस व मेडिकल वेरिफिकेशन जैसी पूरी नियमित प्रक्रिया के बाद हुई थी। इसलिए इन्हें इतने लंबे समय तक कॉन्ट्रैक्ट पर रखकर शोषण नहीं किया जा सकता।

केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि 1375  SSA शिक्षकों को नियमित करना संभव नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी पर फैसले के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा सकता। लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उमा देवी का फैसला उन मामलों पर लागू होता है जहां नियुक्तियां नियमों को दरकिनार करके पिछली राह से की गई हों, जबकि यहां पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई गई थी।

शिक्षक 20 साल से दे रहे हैं सेवाएं
अदालत ने कहा कि ज्यादातर SSA शिक्षक 20 साल से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे हैं और सरकारी स्कूलों में नियमित शिक्षकों की तरह ही काम कर रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को सिर्फ़ “कान्ट्रैक्ट” का नाम देकर अनिश्चितता में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करते हुए सालों तक अस्थायी रोजगार का दुरुपयोग नहीं कर सकती। रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ प्रशासन कई बार केंद्र सरकार को इन शिक्षकों को नियमित करने का प्रस्ताव भेज चुका था, यहां तक कि 1130 पदों की मंज़ूरी भी मिल चुकी थी। इसके बावजूद केंद्र ने 2021 में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।

फैसला सभी पर समान रूप से लागू होगा
अदालत ने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि 6 हफ्तों के भीतर सभी ऐसे शिक्षकों को नियमित किया जाए जिनकी सेवा 10 साल से ज्यादा हो चुकी है और जिनकी नियुक्ति SSA के तहत विधिवत चयन प्रक्रिया से हुई थी। अगर प्रशासन इस अवधि में आदेश जारी नहीं करता, तो ये शिक्षक स्वयं ही पक्का माने जाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सभी SSA शिक्षकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा खड़े न हों।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.