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“हाथियों को पानी में डुबो-डुबो के मारेगा वन विभाग?”, वन्यजीवों की कीमत पर ‘इको टूरिज्म’ को बढ़ावा देने का आरोप

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रायपुर: बारनवापारा अभयारण्य में तीन हाथियों का सफल ऑपरेशन पूरा हो गया है. लेकिन इस घटना से छत्तीसगढ़ वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने इस घटना को विभाग की “घोर लापरवाही” बताते हुए कहा कि विभाग अब वन्य प्राणियों की सुरक्षा के बजाय इको-टूरिज्म को प्राथमिकता देने में जुटा है.

खुले कुएं बने जानलेवा जाल — केंद्र के आदेश के बाद भी नहीं उठाए कदम: सिंघवी ने बताया कि 2018 से ही वे खुले और सूखे कुओं को बंद करने की मांग करते आ रहे हैं. इस पर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी 2021 में छत्तीसगढ़ शासन को कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद, विभाग ने सात सालों में राज्य बजट से इस दिशा में कोई प्रस्ताव तक नहीं भेजा. अनुमान के अनुसार प्रदेश के वन क्षेत्र और आसपास ऐसे 25 हजार से ज्यादा खुले कुएं हैं. वर्ष 2024 में कैंपा फंड से सिर्फ कांकेर जिले में 450 कुओं पर ही सुरक्षा दीवार बनाई गई. सिंघवी का आरोप है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) स्तर पर “एक भी कुआं बंद नहीं करवाया गया.”

बारनवापारा अभयारण्य

“25 सितम्बर को लिखा पत्र, विभाग ने नहीं दी तवज्जो”: वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने बताया कि 25 सितंबर को उन्होंने मुख्यमंत्री और वन विभाग को कीचड़युक्त डबरियों और खुले कुओं के खतरे को लेकर पत्र लिखा था. शासन ने तो इसे गंभीरता से लिया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने कोई रुचि नहीं दिखाई.

2017 से दोहराई जा रही वही गलती — सबक नहीं लिया वन विभाग ने: सिंघवी ने याद दिलाया कि 2017 में प्रतापपुर क्षेत्र में एक हथिनी सूखे कुएं में गिरकर मर गई थी. तब भी यही कहा गया था कि सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. उन्होंने कहा — “हर साल कई भालू, तेंदुए और लकड़बग्घे इन कुओं में गिरकर मरते हैं. शायद वन विभाग को जू में जानवरों की संख्या बढ़ने से खुशी मिलती हो.”

BARNAWAPARA ELEPHANT RESCUE

“वन विभाग को अब झूमर दिखाने की पड़ी है” — इको टूरिज्म पर तंज: वन्यजीव प्रेमी ने कहा कि विभाग अब इको-टूरिज्म बढ़ाने के नाम पर संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में दखल बढ़ा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांगेर वेली नेशनल पार्क की झूमर और ग्रीन गुफाएं, जो लाखों वर्षों से जैव विविधता का खजाना हैं, अब पर्यटन के नाम पर आम जनता के लिए खोली जा रही हैं — जिससे उनकी मूल संरचना नष्ट हो सकती है. सिंघवी ने व्यंग्य करते हुए कहा —“वन विभाग को अब झूमर दिखाने और अचनाकमार में कान्हा से ज्यादा टाइगर दिखाने की चिंता है, हाथियों की नहीं।”

फिल्म निर्माण के नाम पर ‘पटाखों से डराए गए हाथी’: सिंघवी ने खुलासा किया कि बलौदा बाजार वनमंडल के सिद्ध बाबा झरना क्षेत्र में दस दिन पहले एक निजी यूनिवर्सिटी को अकादमिक कार्यों की अनुमति देकर फिल्म निर्माण की शूटिंग कराई गई. शूटिंग के दौरान पटाखे फोड़े गए, जिससे हाथी आतंकित हुए. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब वन विभाग की जानकारी में हुआ, पर किसी अधिकारी ने रोकने की कोशिश नहीं की.

“कब तक गिरते रहेंगे वन्यप्राणी?” — सिंघवी का सीधा सवाल: सिंघवी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) से पूछा —“क्या विभाग की प्राथमिकता वन्यप्राणियों की सुरक्षा है या इको-टूरिज्म का प्रचार?”उन्होंने मांग की कि विभाग को यह बताना चाहिए कि प्रदेश के खुले, सूखे कुएं और कीचड़युक्त डबरियां कब तक वन्यजीवों के लिए सुरक्षित बनाई जाएंगी.

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