Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु... पूर्णिया में बदल रही गांवों की तस्वीर: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 281 परिवारों का बिजली बिल हु... हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में डूबने से चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियो... संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर भदोही बना 'संत रविदास नगर', सीएम योगी ने की सांस्कृतिक पुनर्स्थाप... बिहार विधान परिषद में बड़ा उलटफेर: बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के ... असम के शिलचर में बड़ा हादसा: पानी की टंकी की सफाई के दौरान दम घुटने से 4 लोगों की मौत; इलाके में शोक कटनी में 11 साल पुरानी जर्जर सड़क का केक काटकर मनाया जन्मदिन! कांग्रेस का प्रशासन के खिलाफ अनोखा विर...

महालया अमावस्या के दिन पितरों की विदाई और जानें पूजा का महत्व

28

Mahalaya Amavasya 2025: महालया अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है.यह दिन पितृ पक्ष के अंत और दुर्गा पूजा की शुरुआत का प्रतीक है. महालया अमावस्या पितरों को श्रद्धांजलि देने के लिए खास माना गया है. इस तिथि पर मां दुर्गा धरती पर आगमन के लिए कैलाश पर्वत से विदा लेती है और धरती पर माता रानी का आगमन होता है. जानते हैं साल 2025 महालया अमावस्या कब है और जानें इस तिथि का महत्व.

महालया अमावस्या सर्वपितृ अमावस्या के दिन ही पड़ती है. इस दिन पितृ अपने लोक वापस चले जाते हैं और मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ धरती पर आगमन करती है. साल 2025 में नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार के दिन से हो रही है.

महालया अमावस्या 2025 श्राद्ध का समय

अमावस्या तिथि का श्राद्ध 21 सितंबर 2025, रविवार के दिन है.

  • कुतुप मूहूर्त – सुबह 11 बजकर 50 से लेकर 12 बजकर 38 मिनट रहेगा.

अवधि – 00 घण्टे 49 मिनट्स

  • रौहिण मूहूर्त – दोपहर 12 बजकर 38 से लेकर दोपहर 01 बजकर 27 मिनट तक रहेगा.

अवधि – 00 घण्टे 49 मिनट्स

  • अपराह्न काल – 01 बजकर 27 से 03 बजकर 53 मिनट तक रहेगा.

अवधि – 02 घण्टे 26 मिनट्स

महालया अमावस्या का महत्व

  • महालया अमावस्या के दिन को पितरों को विदाई का दिन माना जाता है.
  • इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है.
  • मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है.
  • गंगा स्नान और पितृ तर्पण से पितरों की कृपा मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है.
  • महालया अमावस्या के बाद शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है, इसलिए यह दिन धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
  • यह दिन न केवल पितरों की कृपा पाने का अवसर है बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का भी मार्ग है।

महालया अमावस्या के दिन पितृ पितृ लोक वापस चले जाते हैं और मां दुर्गा का आगमन होता है. इस दिन तर्पण, पिंडदान कर उनको विदा किया जाता है साथ ही अगले दिन से नवरात्रि की शुरुआत होती है और मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जाता है. इस दिन उनकी आंखों में रंग भरा जाता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.