Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

क्या है पश्चिम बंगाल के मतुआ समुदाय की समस्या, जिसे लेकर बिहार में राहुल गांधी से हुई बात, क्यों बढ़ सकती हैं TMC और BJP की चिंता?

30

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में बिहार में वोटर अधिकार यात्रा की. राहुल गांधी की इस यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल की टीएमसी और बीजेपी की टेंशन बढ़ गई. दरअसल, मतुआ समुदाय के लोग राहुल गांधी के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे. मतुआ समुदाय एक धार्मिक समूह है. यह वो लोग हैं जो विभाजन के दौरान ईस्ट पाकिस्तान से भारत आए थे. लेकिन, आज भी नागरिकता को लेकर यह कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इसी के चलते इस समुदाय ने नागरिकता की उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग के लिए कांग्रेस पार्टी का समर्थन मांगा.

यह समुदाय अपनी समस्याएं लेकर 30 अगस्त को बिहार में कांग्रेस नेता के पास पहुंचा. इसी के बाद सियासी दलों में हलचल मच गई. टीएमसी से लेकर बीजेपी को मतुआ समुदाय की राहुल गांधी की इस मुलाकात से झटका लग सकता है क्योंकि यह समुदाय चुनाव में बड़ा असर रखता है. साथ ही यह दोनों ही दलों के लिए बड़ा वोटबैंक है. इसी बीच उनका कांग्रेस की तरफ झुकाव बीजेपी-टीएमसी की चिंता बढ़ा सकता है.

मतुआ समुदाय का कांग्रेस की तरफ झुकाव

मतुआ समुदाय की राहुल गांधी से हुई मुलाकात को लेकर पूर्व राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि मतुआ समुदाय के कुछ लोग मुझसे मुर्शिदाबाद में मिले क्योंकि वो अब बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी और केंद्र सरकार बीजेपी दोनों से निराश हो रहे हैं. उनका मानना है कि मतुआ समुदाय के मूल मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा और दोनों दलों ने उन्हें सिर्फ चुनावी टूल की तरह इस्तेमाल किया है.

अधीर रंजन ने आगे कहा, अब समुदाय कांग्रेस का समर्थन करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि राहुल गांधी जिस तरह से चुनाव आयोग के खिलाफ मुद्दे उठा रहे हैं, उससे वो प्रभावित हैं. उन्हें डर है कि उनकी मौजूदा स्थिति वोटर लिस्ट में उनके नामांकन को खतरे में डाल सकती ह. मैंने समुदाय का यह संदेश राहुल जी तक पहुंचाया और उन्हें पटना भेजा. वहां उन्होंने राहुल जी से मुलाकात की, यात्रा में हिस्सा लिया और अपनी मांगें रखीं.

राहुल गांधी ने दिल्ली आने के लिए कहा

बिहार के सारण जिले के एकमा कस्बे में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मतुआ समुदाय के बीच मुलाकात हुई. मुतआ प्रतिनिधिमंडल के 24 सदस्यों के बीच यह मुलाकात हुई. प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने इस मुलाकात को लेकर बताया, राहुल गांधी ने हमसे लगभग 15 मिनट तक बातचीत की. हमारी सारी चिंताएं सुनीं और भरोसा दिया कि भविष्य में भी वो लगातार हमसे जुड़े रहेंगे.

अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि राहुल गांधी ने समुदाय से दिल्ली आने को कहा, जहां इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है. हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर और हाशिये पर है. पार्टी के पास वहां सिर्फ एक सांसद है और एक भी विधायक नहीं है. इसी बीच मतुआ समुदाय के साथ हुई यह मुलाकात अहम रोल निभा सकती है.

मतुआ समुदाय की क्या है मांग?

मतुआ समुदाय मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान के रहने वाले हिंदुओं का एक वर्ग है, जो विभाजन के दौरान और बांग्लादेश के निर्माण के बाद धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत में आकर बस गए थे. हालांकि, मतुआ समुदाय के पास मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड हैं, फिर भी समुदाय के सदस्य “कानूनी नागरिकता” की मांग कर रहे हैं क्योंकि ये दस्तावेज़ इसके प्रमाण के तौर पर पर्याप्त नहीं हैं.

हालांकि, वोटबैंक के रूप में यह समुदाय अहम रोल निभाता है. राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति समुदाय का दबदबा है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. टीएमसी और बीजेपी दोनों में मतुआ समुदाय के विधायक हैं.

बीजेपी-TMC के लिए चिंता

बीजेपी के लिए सबसे चिंताजनक बात यह रही कि उसकी ही एक स्थानीय पार्टी इकाई के कार्यकर्ता तपन हल्दर बिहार में गए मतुआ प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करते नजर आए. 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 42 में से 18 सीटें जीती थीं, जिसमें मतुआ समुदाय का बड़ा समर्थन मिला था. मतुआ ने बीजेपी का साथ इसलिए दिया था क्योंकि पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 लागू करने का वादा किया था, जिससे उन्हें नागरिकता मिलना आसान हो जाती. बीजेपी मानती है कि बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता एक सर्व-हिंदू वोटबैंक बनाने से होकर जाता है, जिसमें मतुआ समुदाय की अहम भूमिका है. इसलिए बीजेपी मतुआ के लिए किसी तीसरे विकल्प के उभरने की गुंजाइश भी नहीं छोड़ना चाहती.

वहीं, दूसरी तरफ टीएमसी के लिए भी यह समुदाय अहम भूमिका रखता है. ऐसा में समुदाय का कांग्रेस की तरफ खिसकना दोनों ही दलों के लिए चिंता बढ़ा रहा है.

राहुल गांधी के साथ मतुआ समुदाय की हुई इस मुलाकात पर टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया. वहीं, वरिष्ठ बीजेपी नेता राहुल सिन्हा इस मामले को कोई महत्व नहीं देना चाहते.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.