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दो ब्रेन सर्जरी के बाद भी सद्गुरु ने बाइक से पूरी की कैलाश यात्रा, 18 हजार फीट ऊंचाई तक गए, बताई योग की शक्ति

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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और मुखिया सद्गुरु ने हाल ही में दो बड़ी ब्रेन सर्जरी के बाद भी मोटरसाइकिल से कैलाश यात्रा पूरी की. ब्रेन सर्जरी के बाद भी बाइक से यह कैलाश यात्रा पूरी करके योगा की शक्ति का बड़ा संदेश दिया. लगातार दो इमरजेंसी ब्रेन सर्जरी के करीब डेढ़ साल बाद, आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने मोटरसाइकिल पर कैलाश यात्रा पूरी की और तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया.

कोयंबटूर एयरपोर्ट पर बातचीत में सद्गुरु ने कहा, मेडिकल सलाह के अनुसार मुझे बाइक नहीं चलानी चाहिए थी, फिर भी मैं समुद्र तल से 18,000 फीट की ऊंचाई तक गया. यह योग की शक्ति को सामने रखता है.

सद्गुरु ने यात्रा के बाद क्या कहा?

सद्गुरु ने कहा, मैं योग की शक्ति साबित करने के लिए बाइक से कैलाश गया. मैंने वो किया है जिसे डॉक्टर असंभव कहते थे. इस यात्रा की चुनौतियों को पार करने के अनुभव को शेयर करते हुए, उन्होंने कहा, योग का मतलब है सृष्टि के मूल स्रोत से एक हो जाना, जो हम सबके अंदर है. जब आप सृष्टि के स्रोत से जुड़े होते हैं, तो यह कोई चुनौती नहीं रहती. इस अवस्था में मैंने इसे सहज रूप से पूरा किया है.

हजारों लोगों ने किया सद्गुरु का स्वागत

भारतीय संस्कृति में कैलाश यात्रा को सबसे पवित्र यात्राओं में माना जाता है. जो लोग इसे पूरा करते हैं, उनका बड़े सम्मान के साथ स्वागत किया जाता है. इसी परंपरा को देखते हुए कोयंबटूर एयरपोर्ट पर साधगुरु का स्वागत करने हजारों लोग जुटे. स्थानीय लोग सड़कों पर उमड़ पड़े, जबकि ईशा योग केंद्र से आश्रम तक के रास्ते पर वॉलंटियर खड़े रहे, जिससे यह यात्रा एक भव्य शोभायात्रा में बदल गई.

बॉलीवुड अभिनेता डिनो मोरिया से एक ऑनलाइन बातचीत में सद्गुरु ने पहले कहा था, मैं शिव को देखने नहीं जा रहा हूं. वो तो मेरी आंखें बंद करने पर ही मेरे अंदर मौजूद है. इसके लिए मुझे कैलाश जाने की जरूरत नहीं है. कैलाश सबसे अद्भुत पुस्तकालय है, लेकिन अब मैं इसके लिए भी नहीं जाता. मैं सैकड़ों लोगों को अपने साथ ले जाता हूं. लोग सुबह उठते हैं तो शिव का नाम नहीं लेते, बल्कि शेयर बाजार या सिनेमा की सोचते हैं. ऐसे लोगों के लिए ऊंचाई और बाकी कठिनाइयां उनकी चिंताओं को कम कर देती हैं और हम उन्हें गहरे विषयों पर केंद्रित कर सकते हैं.

टैरिफ को लेकर क्या बोले?

अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ पर सवाल पूछे जाने पर सद्गुरु ने कहा, जब चुनौतियां आती हैं, तो हमें और मजबूत होकर खड़ा होना चाहिए, मुझे यकीन है कि भारत ऐसा जरूर करेगा. भारत की संप्रभुता और अपने ढंग से व्यापार करने की स्वतंत्रता को हम एक स्वतंत्र देश के रूप में कभी नहीं छोड़ सकते.

राष्ट्र के भविष्य की दिशा बताते हुए उन्होंने कहा, आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि उन्नति करने के लिए हमेशा हालात आपके पक्ष में होंगे. जब हालात उलट हों, तब भी आगे बढ़ना चाहिए. यही क्षमता हमें विकसित करनी है. यह हमारे लिए एक अच्छा उदाहरण और सबक है कि भारत हर हालात में तरक्की करे.

सद्गुरु ने कब की यात्रा शुरू?

सद्गुरु ने अपनी यात्रा की शुरुआत 9 अगस्त को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मोटरसाइकिल पर की थी. वहां से वो नेपाल के काठमांडू, भक्तपुर और थुलीखेल होते हुए नेपाल-तिब्बत सीमा पहुंचे. इसके बाद वो तिब्बत के झांगमु, न्यालम और सागा से होकर मानसरोवर झील पहुंचे और वहां से कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए ट्रेक किया. यह रास्ता बेहद कठिन था, लगातार बारिश, भूस्खलन, ऊबड़-खाबड़ इलाका और 15,000 से 20,000 फीट की ऊंचाई यहां पर है.

यात्रा के दौरान स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सद्गुरु का स्वागत करने आए. सिर्फ एक यात्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक पूजनीय गुरु के रूप में. इस दौरान उन्होंने अभिनेता माधवन, क्रिकेटर वरुण चक्रवर्ती और निर्देशक नाग अश्विन जैसे सेलेब्रिटीज के साथ भी ऑनलाइन बातचीत की और योग विज्ञान-शिव के रहस्यों पर चर्चा की.

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