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क्या महंगी होने वाली है चांदी? 3 दिन बाद बदलने वाला है ये नियम

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सरकार ने चांदी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब तक केवल सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य थी, लेकिन अब यही व्यवस्था चांदी के लिए भी लाई जा रही है. 1 सितंबर 2025 से चांदी की हॉलमार्किंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इसका मकसद ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी देना है, ताकि उन्हें उनके पैसे का पूरा मूल्य मिल सके.

हालांकि शुरुआत में यह नियम स्वैच्छिक रहेगा, यानी उपभोक्ता चाहे तो हॉलमार्क वाली चांदी खरीद सकते हैं और चाहे तो बिना हॉलमार्क की भी. लेकिन भविष्य में इसके अनिवार्य होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. सोने की तरह ही ग्राहक अब चांदी में भी गुणवत्ता की मुहर चाहते हैं, जो खरीदारी को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगी.

गुणवत्ता में बढ़ेगा विश्वास

बाजार में यह सवाल उठने लगा है कि क्या हॉलमार्किंग के बाद चांदी महंगी हो जाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे हॉलमार्क वाली चांदी की मांग ज्यादा हो सकती है. हॉलमार्किंग एक प्रमाणिकता की मुहर होती है, जो बताती है कि जिस चांदी को ग्राहक खरीद रहे हैं, वह कितने प्रतिशत शुद्ध है. इससे खरीदारी में धोखाधड़ी की गुंजाइश घटेगी और उपभोक्ता को उनकी राशि के बदले सही उत्पाद मिलेगा.

नंबर बताएगा चांदी की शुद्धता

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी के लिए छह अलग-अलग शुद्धता मानक तय किए हैं, जो गहनों या वस्तुओं पर अंकित होंगे. हर नंबर इस बात का संकेत होगा कि वह चांदी कितनी शुद्ध है.

  • 800 स्टैम्प इसमें चांदी 80% शुद्ध होती है, शेष 20% में तांबा जैसे अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं.
  • 835 स्टैम्प 83.5% शुद्धता वाली चांदी को दर्शाता है.
  • 900 स्टैम्प इसमें चांदी 90% शुद्ध होती है, जो आमतौर पर सिक्कों और खास गहनों में उपयोग होती है.
  • 925 स्टैम्प यह सबसे लोकप्रिय श्रेणी है, जिसे “स्टर्लिंग सिल्वर” कहा जाता है. इसमें 92.5% शुद्धता होती है.
  • 970 स्टैम्प यह 97% शुद्धता वाली चांदी होती है, जिसका इस्तेमाल खास बर्तनों और डिज़ाइनर ज्वेलरी में होता है.
  • 990 स्टैम्प इसे फाइन सिल्वर कहते हैं, जिसमें चांदी 99% शुद्ध होती है. यह बेहद मुलायम होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल बार और सिक्कों में अधिक होता है.

इन मानकों से उपभोक्ताओं को अब चांदी की गुणवत्ता को पहचानने में आसानी होगी और विक्रेताओं की जवाबदेही भी तय होगी.

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