Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

दाईं और बाईं सूंड वाले गणपति, घर और मंदिर में क्यों रखी जाती हैं अलग-अलग तरह की प्रतिमाएं?

84

भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, हर शुभ कार्य के आरंभ में पूजे जाते हैं. उनकी प्रतिमाओं में उनकी सूंड की दिशा हमेशा एक चर्चा का विषय रही है. क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ मूर्तियों में उनकी सूंड बाईं ओर और कुछ में दाईं ओर क्यों होती है? यह सिर्फ़ एक डिज़ाइन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व छिपा है.

गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा गया है, यानी कहीं उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी मिलती है, तो कहीं दाईं ओर.दोनों ही स्वरूपों का अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. आइए जानते हैं कि घर और मंदिर में रखी जाने वाली गणेश प्रतिमाओं में सूंड की दिशा अलग-अलग क्यों होती है.

बाईं ओर सूंड वाले गणपति

घर में पूजन के लिए श्रेष्ठ

परंपरा के अनुसार, घरों में बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है. इसका कारण यह है कि शरीर का बायां हिस्सा हृदय और भावनाओं से जुड़ा होता है. यह जीवन की भौतिक और भावनात्मक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करता है.

सुख-शांति और सौम्यता का प्रतीक

बाईं सूंड वाले गणपति को शांत और सौम्य स्वरूप वाला माना जाता है. घर में इस प्रतिमा की पूजा करने से परिवार में शांति, प्रेम और आपसी सामंजस्य बना रहता है.

वेदिक परंपरा का प्रभाव

यह मान्यता वैदिक परंपरा से जुड़ी है, जहां गणपति का यह स्वरूप घर-परिवार में समृद्धि और स्थिरता का कारक माना गया है.

दाईं ओर सूंड वाले गणपति

मंदिरों और तांत्रिक परंपरा में पूजनीय

दाईं ओर सूंड वाले गणपति की मूर्ति आमतौर पर मंदिरों में स्थापित की जाती है. शरीर का दायां हिस्सा आध्यात्मिकता और ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. इसलिए तांत्रिक परंपराओं में इस स्वरूप का विशेष महत्व है.

सक्रियता और शक्ति का प्रतीक

इस स्वरूप को अत्यधिक शक्तिशाली और जाग्रत माना गया है. मान्यता है कि जो व्यक्ति धन-धान्य, ऐश्वर्य और शक्ति की कामना करता है, उसे दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा करनी चाहिए.

सावधानी की आवश्यकता

शास्त्रों में बताया गया है कि इस स्वरूप की पूजा विधि-विधान से ही करनी चाहिए. यही कारण है कि इसे सामान्य घरों की बजाय मंदिरों और विशेष साधनाओं में स्थापित किया जाता है.

सूंड की दिशा का आध्यात्मिक संदेश

गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती-डुलती रहती है, जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत देती है. यह हमें सिखाती है कि जीवन में भी हमें सदैव कर्मशील और जाग्रत रहना चाहिए.

बाईं सूंड: शांति, प्रेम, सौम्यता और पारिवारिक सुख का प्रतीक.

दाईं सूंड: शक्ति, आध्यात्मिकता, ऐश्वर्य और विजय का प्रतीक.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.