Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

दाईं और बाईं सूंड वाले गणपति, घर और मंदिर में क्यों रखी जाती हैं अलग-अलग तरह की प्रतिमाएं?

102

भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, हर शुभ कार्य के आरंभ में पूजे जाते हैं. उनकी प्रतिमाओं में उनकी सूंड की दिशा हमेशा एक चर्चा का विषय रही है. क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ मूर्तियों में उनकी सूंड बाईं ओर और कुछ में दाईं ओर क्यों होती है? यह सिर्फ़ एक डिज़ाइन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व छिपा है.

गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा गया है, यानी कहीं उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी मिलती है, तो कहीं दाईं ओर.दोनों ही स्वरूपों का अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है. आइए जानते हैं कि घर और मंदिर में रखी जाने वाली गणेश प्रतिमाओं में सूंड की दिशा अलग-अलग क्यों होती है.

बाईं ओर सूंड वाले गणपति

घर में पूजन के लिए श्रेष्ठ

परंपरा के अनुसार, घरों में बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है. इसका कारण यह है कि शरीर का बायां हिस्सा हृदय और भावनाओं से जुड़ा होता है. यह जीवन की भौतिक और भावनात्मक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करता है.

सुख-शांति और सौम्यता का प्रतीक

बाईं सूंड वाले गणपति को शांत और सौम्य स्वरूप वाला माना जाता है. घर में इस प्रतिमा की पूजा करने से परिवार में शांति, प्रेम और आपसी सामंजस्य बना रहता है.

वेदिक परंपरा का प्रभाव

यह मान्यता वैदिक परंपरा से जुड़ी है, जहां गणपति का यह स्वरूप घर-परिवार में समृद्धि और स्थिरता का कारक माना गया है.

दाईं ओर सूंड वाले गणपति

मंदिरों और तांत्रिक परंपरा में पूजनीय

दाईं ओर सूंड वाले गणपति की मूर्ति आमतौर पर मंदिरों में स्थापित की जाती है. शरीर का दायां हिस्सा आध्यात्मिकता और ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. इसलिए तांत्रिक परंपराओं में इस स्वरूप का विशेष महत्व है.

सक्रियता और शक्ति का प्रतीक

इस स्वरूप को अत्यधिक शक्तिशाली और जाग्रत माना गया है. मान्यता है कि जो व्यक्ति धन-धान्य, ऐश्वर्य और शक्ति की कामना करता है, उसे दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा करनी चाहिए.

सावधानी की आवश्यकता

शास्त्रों में बताया गया है कि इस स्वरूप की पूजा विधि-विधान से ही करनी चाहिए. यही कारण है कि इसे सामान्य घरों की बजाय मंदिरों और विशेष साधनाओं में स्थापित किया जाता है.

सूंड की दिशा का आध्यात्मिक संदेश

गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती-डुलती रहती है, जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत देती है. यह हमें सिखाती है कि जीवन में भी हमें सदैव कर्मशील और जाग्रत रहना चाहिए.

बाईं सूंड: शांति, प्रेम, सौम्यता और पारिवारिक सुख का प्रतीक.

दाईं सूंड: शक्ति, आध्यात्मिकता, ऐश्वर्य और विजय का प्रतीक.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.