जब हार्ट की नसें यानी कोरोनरी आर्टरीज में फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों का जमाव हो जाता है, तो इसे हार्ट में ब्लॉकेज कहा जाता है. इस स्थिति को “एथेरोस्क्लेरोसिस” भी कहा जाता है. यह जमाव धीरे-धीरे ब्लड फ्लो को धीमा करता है, जिससे हार्ट को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं. समय के साथ ब्लॉकेज बढ़ने पर हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का खतरा भी होता है. अक्सर यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआत में इसके लक्षण बेहद मामूली या असामान्य हो सकते हैं, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. आइए जानते हैं कि हार्ट में ब्लॉकेज क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है.
हार्ट ब्लॉकेज के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से मुख्य है, खराब लाइफस्टाइल. अत्यधिक तैलीय और फैट युक्त भोजन, धूम्रपान, शराब का सेवन, एक्सरसाइज की कमी और लगातार तनाव ब्लॉकेज को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज भी इस समस्या के विशेष कारण हैं. जेनेटिक फैक्टर से भी किसी व्यक्ति में यह समस्या हो सकती है, विशेषकर अगर परिवार में पहले किसी को हार्ट डिजीज रहा हो. उम्र बढ़ने के साथ नसों का लचीलापन कम हो जाता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ता है. समय रहते इन कारणों पर ध्यान न देने से यह समस्या गंभीर हो सकती है और जानलेवा भी साबित हो सकती है.
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