Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

महाकुंभ भगदड़: मुआवजा देने में हुई देरी, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार

39

महाकुंभ मेले में 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ मचने से कई लोगों की जान चली गई थी. जान गंवाने वाले परिजनों को सरकार ने मुआवजा देने का वादा किया था. लेकिन अब तक परिजनों को मुआवजा नहीं मिला. जिसको लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.

कोर्ट की अवकाश पीठ ने सरकार के रवैये को ‘अस्थिर’ और ‘नागरिकों की पीड़ा के प्रति उदासीन’ करार दिया है. जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस संदीप जैन की खंडपीठ ने उदय प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त टिप्पणी की.

अदालत ने सरकारी कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

कोर्ट ने सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि याची उदय प्रताप सिंह की पत्नी 52 वर्षीय सुनैना देवी की कुंभ भगदड़ में गंभीर चोटें लगने से मृत्यु हो गई थी. उन्होंने कहा कि इस केस में खास बात यह थी कि शव का न तो पोस्टमार्टम हुआ और न ही परिवार को यह जानकारी दी गई कि महिला कब और किस हालत में अस्पताल लाई गई थी. कोर्ट ने इसे सरकारी संस्थानों की एक गंभीर चूक बताते हुए फटकार लगाई.

मुआवजा मिलने में हो रही देरी

पीठ ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार ने मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की बात कही थी, तो फिर इसका समय से पालन करना सरकार का दायित्व था. कोर्ट ने कहा कि नागरिकों की कोई गलती नहीं थी, और ऐसी त्रासदियों में राज्य का यह कर्तव्य है कि वह पीड़ित परिवारों की देखभाल और सहायता सुनिश्चित करे.

कोर्ट ने राज्य सरकार को मुआवजे से संबंधित प्राप्त और लंबित सभी दावों का ब्योरा प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिया हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के ट्रस्टी के रूप में कार्य करती है और उसे पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए.

घायलों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का मांगा विवरण

कोर्ट ने मामले में चिकित्सा संस्थानों, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए निर्देश दिया कि वे एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें. जिसमें वह 28 जनवरी को मरने वाले सभी मृतकों और मरीजों का ब्यौरा शामिल करें. कोर्ट ने उसमें उने सभी डॉक्टरों का भी विवरण मांगा है, जिन्होंने घायलों का उपचार कर उन्हें मृत घोषित किया था.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.