Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Goa Voter List 2026: गोवा की फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को नहीं होगी जारी, चुनाव आयोग ने बदली तारीख सोनम वांगचुक मामला: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, रिहाई की मांग का किया विरो... Patna News: घर में मिली हाई कोर्ट की महिला वकील इंदिरा लक्ष्मी की अधजली लाश, मर्डर या सुसाइड की गुत्... Hardeep Puri vs Rahul Gandhi: एपस्टीन से मुलाकात पर हरदीप पुरी की सफाई, राहुल गांधी के आरोपों को बता... Lucknow Crime News: लखनऊ में बुआ-भतीजे ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, लव अफेयर या पारिवारिक विवाद; जा... Rohit Shetty Case: रोहित शेट्टी मामले में बड़ा खुलासा, अब MCOCA एंगल से जांच करेगी पुलिस Vande Mataram New Rules: वंदे मातरम् को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें मुस्लिम धर्मगुरुओं और... Bhagalpur Hospital Controversy: मंत्री लेशी सिंह के बीपी चैकअप पर बवाल, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ जांच क... Delhi News: 'जंगलराज' के आरोपों के बीच गरमाई दिल्ली की सियासत, AAP नेताओं ने कानून व्यवस्था को लेकर ... Delhi Metro Phase 4: दिल्ली मेट्रो के 3 नए कॉरिडोर को मंजूरी, 13 स्टेशनों के साथ इन इलाकों की बदलेगी...

जबरन धर्म परिवर्तन करवाना संविधान के खिलाफ… जानें इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्यों की ये टिप्पणी

9

भारतीय संविधान सभी नागरिकों को स्वतंत्र रूप से अपने धर्म को मानने और उसका प्रचार-प्रसार करने का पूरा अधिकार देता है, लेकिन वह जबरन धर्म परिवर्तन करवाने का विरोध करता है. ये टिप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने की है. उन्होंने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन लोगों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी जिनके ऊपर लोगों को पैसे और मुक्त इलाज का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने पर मजबूर करने का आरोप था.

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला गंभीर है, पुलिस इसको लेकर उचित कार्रवाई करेगी. दरअसल, 4 आरोपियों पर उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 के तहत मामला दर्ज किया गया था.

‘जबरन धर्म परिवर्तन करवाना संविधान के खिलाफ’

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि भारत का संवैधानिक प्रारूप अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है. संविधान धर्म का प्रचार करने की पूरी आजादी देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जबरन धर्म परिवर्तन करवाने की भी आजादी देता है. कोर्ट का मानना है किसी एक धर्म को दूसरे धर्म से बेहतर समझना भारतीय धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है. इसके बाद कोर्ट ने कहा, ‘किसी धर्म को स्वाभाविक रूप से श्रेष्ठ मानना यह दर्शाता है कि बाकी धर्म उससे कमतर हैं. यह सोच भारतीय संविधान की सेक्युलर भावना के बिल्कुल विपरीत है. राज्य को सभी धर्मों से समान दूरी रखनी चाहिए.

क्या है अनुच्छेद 25?

भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र जीवन जीने के लिए कुल 6 मौलिक अधिकार दिए हैं. यह मौलिक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 12 से लेकर अनुच्छेद 35 में दिए हैं. मौलिक अधिकार के अनुच्छेद 25 में नागरिकों को अपने धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है. इसके अतिरिक्त इसकी कुछ सीमाएं भी हैं, जिसके अंतर्गत आप किसी भी व्यक्ति को जबरन उसका धर्म परिवर्तन करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते. संविधान में किसी भी एक धर्म को सर्वश्रेष्ठ नहीं माना गया है. भारतीय संविधान के अनुसार सभी धर्म एक समान है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.