Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

बद्रीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ क्यों कहा जाता है? जानें इसका महत्व

43

चार धाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे. हालांकि, यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट खोले जा चुके हैं. बद्रीनाथ की यात्रा भी जल्द शुरू हो जाएगी. हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा का विशेष महत्व माना गया है. चारों धामों में से एक बद्रीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ भी कहते हैं, लेकिन ऐसा क्यों? चलिए आपको बताते हैं कि बद्रीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ क्यों कहा जाता है.

बद्रीनाथ धाम को बैकुंठ क्यों कहते हैं?

बद्रीनाथ धाम का चार धामों में विशेष महत्व माना जाता है इसलिए इसे धरती का बैकुंठ धाम भी कहते हैं. इसका कारण है कि बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु निवास करते हैं, इसलिए इसे हिंदू धर्म में प्रमुख धाम का स्थान दिया गया है. धार्मिक मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन में एक बार बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, तो उसे जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए इसे दिव्य लोक भी कहा जाता है.

बद्रीनाथ में कौन से भगवान की मूर्ति है?

बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु, जिन्हें वहां बद्रीनारायण भी कहा जाता है, की पूजा की जाती है. यहां उनकी एक मीटर ऊंची काले पत्थर की स्वयंभू मूर्ति स्थापित है, जिसकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने नारद कुंड से निकालकर की थी. इस मूर्ति के दाहिनी ओर कुबेर देव, लक्ष्मी जी और नारायण की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं. यह मूर्ति भगवान विष्णु की आठ स्वयं प्रकट हुई मूर्तियों में से एक मानी जाती है.

बद्रीनाथ धाम में दर्शन कैसे करें?

  • बद्रीनाथ धाम में दर्शन के लिए आपको सुबह उठकर गर्म कुंड में स्नान करना है.
  • गर्म कुंड में स्नान करने के बाद फिर आपको नए कपड़े पहनने चाहिए.
  • फिर आदि ईश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करने चाहिए.
  • इसके बाद वहां पर मिलने वाले प्रसाद को लेकर भगवान के दर्शन करें.
  • बद्रीनाथ मंदिर अलकनंदा नदी और पर्वतों के बीच स्थित है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.