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J-K: किश्तवाड़ में धंसी जमीन; 22 परिवारों को किया गया शिफ्ट, क्या ये है भूस्खलन का जिम्मेदार?

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जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात बरतने शुरू कर दिए हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि भूस्खलन के मद्देनजर कम से कम 22 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध मचैल माता मंदिर को जोड़ने वाले किश्तवाड़-पेडर मार्ग भी शनिवार को लगातार तीसरे दिन यातायात के लिए बंद रखा गया.

वहीं, जिला विकास आयुक्त राजेश कुमार शवन ने किश्तवाड़-पेडर रोड के साथ सिंगराह नाला, पथरनाकी में भूस्खलन संभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया. नागसिनी के तहसीलदार मोहम्मद रफी नाइक ने पीटीआई से बातचीत में बताया कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए उपाय किए हैं. पहाड़ी पर स्थित गांव के करीब 22 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और उन्हें तंबू और राशन मुहैया कराया गया है.

पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थर- तहसीलदार

नागसिनी के तहसीलदार ने बताया कि जमीन धंसने और भूस्खलन से किसी भी घर में कोई दरार नहीं आई है. लेकिन स्थानीय लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है. नाइक भूस्खलन संभावित क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि जमीन धंसने की वजह से सड़क का 200 मीटर से अधिक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जबकि पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण सड़क साफ करने के काम में बाधा आ रही है.

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन स्थिति से अवगत है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कड़ी नजर रखे हुए है. बता दें कि सर्दियों के बाद, एक सप्ताह पहले ही मचैल माता मंदिर को तीर्थयात्रियों के लिए खोला गया था, जिसके साथ ही वार्षिक तीर्थयात्रा की शुरुआत हुई थी. हालांकि, पथरनाकी के पास सड़क बंद होने और भूस्खलन के खतरे के कारण यात्रा प्रभावित हुई है.

स्थानीय लोगों ने बताया ‘विस्फोट जिम्मेदार’

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थिति के लिए नजदीक में नदी पर बन रही 624 मेगावाट की किरू जलविद्युत परियोजना के लिए एजेंसी द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे विस्फोट जिम्मेदार हैं. वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि परियोजना स्थल की गहन जांच के बाद जिला विकास आयुक्त ने जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) अधिकारियों को सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित कर काम में तेजी लाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए.

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