Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
11 साल बाद बने संगठन के साथ ही सिरसा कांग्रेस में उभरी अंदरूनी खींचतान, बेनीवाल और सेतिया में जुबानी... हरियाणा में बिना मान्यता प्राप्त 693 निजी स्कूलों पर गिरेगी गाज! DEO से मांगी बंद कराए गए स्कूलों की... हरियाणा कांग्रेस में आंतरिक कलह तेज: विधायक गोकुल सेतिया ने पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह को दी खुली चुन... समालखा में महिला की संदिग्ध मौत पर अस्पताल में बवाल: पुलिस पर सुसाइड नोट में आरोप, परिजनों का पोस्टम... नारनौल में दर्दनाक हादसा! खासपुर के पास नहर में नहाने उतरे दो किशोर डूबे, दोनों की मौत से गाँव में म... हरियाणा में कॉमनवेल्थ विजेताओं का सम्मान समारोह स्थगित: PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कारण लिया गया ... हरिद्वार में भीषण सड़क हादसा! फरीदाबाद से कांवड़ लेने गए 3 दोस्तों की बाइक को बस ने मारी टक्कर, 1 की... हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन! 17 IAS और 7 HCS अधिकारियों के ट्रांसफर, जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदा... खेलों का 'पावरहाउस' हरियाणा: 2% आबादी वाले राज्य का देश के 1/3 अंतर्राष्ट्रीय पदकों पर दबदबा रांची में JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग तेज: अनशन पर बैठे राहुल क्रांति की बिगड़ी तबीयत, NDA विधायक...

भारत से प्यार है, यह मेरे दूसरे घर जैसा है… गृहमंत्री से परमिट बढ़ाने की गुहार लगाकर बोलीं तस्लीमा नसरीन

37

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह से गुहार लगाई कि उन्हें भारत में रहने दिया जाए. दरअसल, मामला यह है कि उनका रेजिडेंस परमिट खत्म हो रहा है और इसी को बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर गुहार लगाई है.

लेखिका ने भारत को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा, मैं यहां 22 साल से रह रही हूं, पर गृह मंत्रालय मेरा परमिट 22 जुलाई से बढ़ा नहीं रहा है. इसको लेकर मैं चिंता में हूं. अगर आप इसे बढ़ा देंगे, तो मैं आपकी आभारी रहूंगी.

स्वीडन की नागरिकता रखने वाली नसरीन कई मौकों पर इस्लाम के कट्टर स्वरूप की आलोचना कर चुकी हैं. वह धर्म में सुधार की मांग भी करती हैं.जिसकी वजह से अक्सर वह कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती हैं. उनकी पहचान एक नारीवादी के रूप में भी है. अपनी उपन्यास लज्जा को लेकर भी वह चर्चा में रही थीं.

फतवा के कारण देश छोड़ा

बांग्लादेश की लेखिका को 90 के दशक में कट्टरपंथियों की धमकी के बाद देश छोड़ना पड़ा थ. उन पर इस्लाम के खिलाफ लिखने का आरोप लगा था. 1994 में उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. निर्वासन के दौरान वह अमेरिका और यूरोप में भी रहीं हैं, उसके बाद वे भारत में ही रह रही हैं. वर्ष 1998 में वह कुछ दिनों के लिए वापस बांग्लादेश गईं लेकिन शेख हसीना की सरकार ने उन्हें वहां रहने नहीं दिया.

जुलाई में खत्म हो गया है परमिट

बांग्लादेशी लेखिका का रेजिडेंस परमिट 27 जुलाई को खत्म हो गया है, जिसे भारत सरकार ने अभी तक रिन्यू नहीं किया है. लेखिका ने कहा कि भारत में रहना उन्हें अच्छा लगता है, क्योंकि यहां की और बांग्लादेश की संस्कृति और परिवेश एक जैसे हैं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं अपने घर से बाहर रह रही हूं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.