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पीतल की लौंग मिलने पर खुद को सर्राफ समझने लगते हैं कुछ लोग… किस पर है वसुंधरा राजे का तंज?

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राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बिना किसी का नाम लिए कटाक्ष किया कि कुछ लोग पीतल की लौंग मिलने पर भी खुद को सर्राफ समझने लगते हैं. राजे के इस बयान के बाद तमाम तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं. राजे ने कहा, ‘चाहत बेशक आसमां छूने की रखो, लेकिन पांव हमेशा जमीं पर रखो.’राजे जयपुर के बिड़ला सभागार में सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर के नागरिक अभिनन्दन कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं.

माथुर की प्रशंसा करते हुए राजे ने कहा, ‘ओम माथुर चाहे कितनी ही बुलंदियों पर पहुंचें, इनके पैर सदा जमीन पर रहें हैं इसीलिए इनके चाहने वाले भी असंख्य हैं. वरना कई लोगों को पीतल की लौंग क्या मिल जाती है, वह अपने आप को सर्राफ समझ बैठते हैं.’

ओम माथुर ऊपर से गरम, भीतर से नरम- वसुंधरा

उन्होंने कहा कि माथुर से ऐसे लोगों को सीख लेना चाहिए कि चाहत बेशक आसमां छूने की रखो, पर पांव हमेशा जमीं पर रखो.’ वसुंधरा ने कहा, ‘ओम माथुर ऊपर से गरम, भीतर से नरम है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में कमल खिलाकर असंभव को संभव किया. राज्यपाल शक्ति रहित नहीं, शक्ति सहित होता है. संविधान बनाते वक्त यह तय हुआ कि देश में जैसे राष्ट्रपति हैं, वैसे ही राज्य को गवर्न करने के लिए गवर्नर होंगे इसलिए राज्य में गवर्नर ही सबसे शक्तिशाली होता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि राज्यपाल किसी भी विधेयक को रोक सकता है. वह मंत्री परिषद की सलाह से काम तो करता हैं, लेकिन अनुच्छेद 166(2) के अनुसार उसका निर्णय ही अंतिम होता है.’

सीएम भजनलाल शर्मा ने भी की माथुर की तारीफ

पूर्व मुख्यमंत्री ने माथुर को सिक्किम का राज्यपाल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने माथुर के साथ बिताए यादगार पलों को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सिक्किम के राज्यपाल के रूप में माथुर अपने संवैधानिक दायित्वों का बखूबी निर्वहन करते हुए जनसेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे. कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी व डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, राज्यसभा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी भी मौजूद थे.

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