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माता-पिता से अलग नहीं हुआ पति तो छोड़ कर चली गई पत्नी, कोर्ट ने कहा नहीं मिलेगा भरण-पोषण

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सागर। परिवार न्यायालय ने पति-पत्नी के अलग-अलग रहने के दौरान पत्नी द्वारा मांगे गए भरण पोषण के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि बिना उचित कारण के पत्नी अगर पति से अलग रहती है तो उसे भरण पोषण पाने का अधिकार नहीं है। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि पत्नी़ पति को अपने माता-पिता से अलग रहने को कहती थी, लेकिन जब उसने माता-पिता को नहीं छोड़ा तो वह पति से अलग होकर रहने लगी।

कुटुंब न्यायालय सागर में न्यायाधीश अतुल कुमार खंडेलवाल के न्यायालय में विठ्ठल नगर निवासी 28 वर्षीय महिला ने अपने पति के खिलाफ धारा 125 भरण पोषण का मामला लगाया था। जिसमें महिला ने कहा था कि वह अपने पति से अलग रहती है और वह अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है और उसे अलग रह रहे पति से भरण पोषण दिलाया जाए।

न्यायालय ने महिला द्वारा पेश किए गए तमाम तर्कों में पाया कि आवेदिका अपने पति के साथ न रहकर, अलग रहती है लेकिन आवेदिका मामले की विवेचना के दौरान न्यायालय में ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह सिद्ध हो कि अनावेदक पति द्वारा उसे किसी भी प्रकार दहेज की मांग अथवा प्रताड़ना दी गई हो और प्रति परीक्षण में न्यायालय ने पाया कि अनावेदक पति के ऊपर जबरन दबाव बनाकर बिना किसी वजह से पति से अलग रह रही है।

अनावेदक पति का कहना था कि आवेदिका ने उसके खिलाफ महिला थाना में दहेज प्रताड़ना की झूठी रिपोर्ट की है जबकि वह पत्नी को साथ रखने के लिए हमेशा तैयार रहा है, लेकिन आवेदिका पत्नी उसके साथ रहने को तैयार नहीं है। क्योंकि उसे अनावेदक पर भरोसा नहीं है।

प्रति परीक्षण में पाया गया कि अनावेदक द्वारा आवेदिका को अपने साथ रखने के प्रयास किए गए तथा वह आवेदिका को लेने उसके घर भी गया, परंतु आवेदिका अनावेदक के साथ जाने को तैयार नहीं है।

माता-पिता से अलग रहने का बनाती है दबाव

पत्नी अपने साक्ष्य से पति से अलग रहने का करने का कोई युक्तियुक्त कारण प्रमाणित करने में असफल रही है, इसके विपरीत पति द्वारा दिए गए साक्ष्य से यह साबित हुआ कि पत्नी उस पर अपने माता पिता से पृथह होकर सागर में रहने के लिये दबाब डालती थी, इसी कारण वह उससे पृथक निवास कर रही है। पत्नी ने अपने साक्ष्य कथन में बताया है कि वह उसके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। वह अपने पिता पर आश्रित है। आवेदिका के पास स्वयं की आय का कोई साधन नहीं है और वह अपना भरण पोषण करने में असमर्थ है।

झूठ बोल कर की शादी

आवेदिका ने न्यायालय में कहा कि जब उसका विवाह हुआ था तब उसे यही बताया था कि लड़का वह स्टोन क्रशर पर मैनेजर का काम करता है और 25 हजार रुपये महीने कमाता है और खेती भूमि से भी आय है। पति ने न्यायालय में बताया कि वह कोई काम नहीं करता है। उसकी मां बीडी बनाती हैं, घर में किराने की एक छोटी दुकान है, जिससे परिवार का खर्चा चलता है। न्यायालय ने परीक्षण कथनों में प्रमाणित पाया कि अनावेदक के पास आय के पर्याप्त साधन है तथा वह अपनी पत्नी आवेदिका को भरण पोषण राशि अदा करने में सक्षम है। इस आधार पर आवेदिका का आवेदन पत्र धारा 125 खारिज किया जाता है।

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