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तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में सिमटी नर्मदा, श्रद्धालुओं को स्नान में हुई परेशानी

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खंडवा। तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी घाटों से दूर चली जाने से श्रद्धालुओं को स्नान में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति ओंकारेश्वर पावर हाउस से बिजली उत्पादन आगामी 40 घंटे के लिए बंद करने से बनी है। नर्मदा नदी पर बड़वाह के निकट नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन ब्रिज के दो पिलर नर्मदा नदी में खड़े करने का कार्य चल रहा है।

ब्रिज के पिलर की कैंपिंग के लिए एनएचएआइ की मांग पर एनएचडीसी द्वारा नर्मदा में पानी का प्रवाह शुक्रवार से 40 घंटे के लिए रोका गया है। इससे तीर्थनगरी सहित बांध के डाउनस्ट्रीम में नर्मदा सिमट गई है। ओंकारेश्वर में श्रद्धालु जगह-जगह रुके हुए पानी में स्नान करने को विवश हुए।

रविवार से ओंकारेश्वर की निकट ग्राम स्थापना में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव पुराण कथा की शुरुआत हो रही है इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार से ही ओंकारेश्वर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु नर्मदा स्नान के साथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने ओंकारेश्वर पहुंच रहे हैं, लेकिन नर्मदा में पानी कम होने से उन्हें स्नान के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

वैसे नर्मदा का जलस्तर कम होने और सिमटने की समस्या से आए दिन श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ओंकारेश्वर बांध के निर्माण के बाद से बारिश के मौसम को छोड़ बांध के गेट हमेशा बंद रहने से नर्मदा की धारा बांध से बनने वाली बिजली की टरबाइन से छोड़े जाने वाले पानी निर्भर रहती है।

मांग के अनुसार बिजली का निर्माण किया जाता है। ऐसे में नर्मदा में जलस्तर घटता- बढ़ता रहता है।लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं द्वारा नर्मदा की अविरल जलधारा और जलस्तर ओंकारेश्वर में एक समान रखने की मांग हो रही है।

इस और शासन- प्रशासन और एनएचडीसी प्रबंधन द्वारा कोई प्रभावी पहल नहीं होने से कई बार आंदोलन और प्रदर्शन भी हो चुके हैं। ओंकारेश्वर के समाजसेवियों का कहना है कि पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में एक ओर जहां लाखों की भीड़ आ रही है वहीं बांध से पानी रोकना सही नहीं है ऐसे में श्रद्धालु स्नान के लिए नर्मदा के बीच पहुंचने पर हादसों का शिकार हो सकते हैं।

इधर अधिकारियों का कहना है कि 40 घंटे के लिए पानी रोकने का निर्णय उच्च स्तर पर हुआ है। स्थानीय स्तर पर इस संबंध में पूर्व में कोई सूचना नहीं दी गई है।

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