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पिज्जा पार्टी के नाम से पांच हजार रुपये अलग से, बैंगलोर से ड्रेस लाने के लिए मांग रहे 13 हजार

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जबलपुर में चल रहे निजी स्कूलों ने अभिभावकों से अवैध फीस वसूलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ज्ञान गंगा अर्किट स्कूल अंधमूक बाइपास ने तो बच्चों की किताबों से लेकर यूनिफार्म तक बैंगलौर से मंगवाकर दी। इसकी एवज में उन्होंने हजारों रुपये उनसे वसूले। अभिभावन ने यहां तक बताया कि स्कूल द्वारा बिना सूचना के फीस बढ़ा दी। वहीं बच्चे से मनमाने फीस के साथ पिज्जा पार्टी के नाम से पांच-पांच हजार रुपये अलग से फीस ली जाती है।

पिज्जा पार्टी के नाम से पांच हजार रुपये, बैंगलोर से ड्रेस लाने के लिए मांग रहे 13 हजार

 

यूनिफार्म के 12 हजार रुपये तक लिए गए। यहां तक की एक ही कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों ने अलग-अलग फीस ली जा रही है। एक अभिभावक ने कलेक्टर को बताया कि टीसी निकालने के 50 हजार मांगे जा रहे हैं। आइडी कार्ड के भी 450 रुपये लेते हैं। ड्रेस भी 13-13 हजार रुपये में बैंगलोर से आती है। क्राईस्टचर्च स्कूल में भी बिना पूर्व सूचना के फीस वृद्धि जैसे कई शिकायतों की सुनवाई की गई। संस्था के प्रतिनिधि ने तो आइएसबीएन के संबंध में भी जानकारी नहीं होने की बात कही। स्कूल में अधिकाशं पुस्तकें बी कैटेगरी के होने तथा पुस्तकें बिना आइएसबीएन नंबर के संचालित होने पर संबंधित अधिकारी को उक्त दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

 

स्कूल फीस और प्रबंधन की खरीदारी की जीएसटी विभाग से जांच करवाई जाएगी

अभिभावकों की इन शिकायतों को सुनने के बाद कलेक्टर दीपक सक्सेना ने प्रबंधन को जमकर फटकार लगाई आैर प्रशासन की जांच समिति को निर्देश दिया कि वे दोबारा स्कूल जाकर फिर से जांच करें। यदि स्कूल प्रबंधन जानकारी छिपाता है तो प्रशासन के पास दूसरे भी कदम हैं। जरूरत पड़ी तो स्कूल फीस और प्रबंधन की खरीदारी की जीएसटी विभाग से जांच करवाई जाएगी।

 

ताकि आने वाले साल से स्कूल सर्तक रहें और अभिभावकों से वसूली न करें

 

कलेक्ट्रेट में खुली जनसुनवाई हुई, जिसमें कलेक्टर ने क्राईस्टचर्च स्कूल, ज्ञान गंगा आर्चिड इंटरनेशनल स्कूल, लिटिल वर्ल्ड कटंगा एवं तिलवाराघाट, सत्यप्रकाश स्कूल पोलीपाथर, अजय सत्यप्रकाश स्कूल, चैतन्य टैक्नो स्कूल, नालंदा स्कूल के खिलाफ अभिभावकों की शिकायत सुनी। उन्होंने स्कूल की ओर से आए प्रबंधन, प्राचार्यो की जमकर क्लास ली और कहा कि आप देश का भविष्य तैयार कर रहे कि उनसे वसूली। प्रशासन की यह कार्रवाई दिखावा नहीं है बल्कि हम एक नाजीर पेश करना चाहते हैं, ताकि आने वाले साल से स्कूल सर्तक रहें और अभिभावकों से वसूली न करें।

 

क्राइस चर्च स्कूल ने लगाई फर्जी किताब

 

सुनवाई के दौरान क्राइस चर्च स्कूल द्वारा विभिन्न कक्षाओं में लगाई गई किताबों की जांच हुई। इसमें सामने आया कि जो किताबें कोर्स में जोड़ी गई हैं, वह फर्जी हैं। कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन से कहा कि इन किताबों में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर ही नहीं है। इससे यह जाहिर होता है यह किताबें फर्जी हैं और कापी करके बनाई गई है। इतना ही नहीं स्कूल की सालीवाड़ा ब्रांच से इस साल 20 से 22 प्रतिशत तक फीस बढ़ाई है, जबकि वे 10 फीसदी ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसकी भी जानकारी उन्हें जिला समिति को देनी होती है। इधर कलेक्टर ने बताया कि ज्ञान गंगा स्कूल द्वारा बैंगलोर से छात्रों के लिए मंगवाई जा रही किताबों की जांच रिपोर्ट में वे भी फर्जी निकली हैं। उनमें भी आइएसबीएन नंबर ही नहीं है। ऐसे में बच्चों को फर्जी किताबों से पढ़ाना अपराध है। इस दौरान उन्होंने ऐसे मामलों में धारा 468 का हवाला देकर कहा कि इसमें सात साल की सजा का प्रावधान हैं।

 

30 फीसदी तक बढ़ा दी फीस

 

कलेक्टर की खुली सुनवाई में अभिभावकों ने खुलकर अपनी समस्याएं बताई। इस दौरान कलेक्टर ने सभी स्कूलों के प्रबंधक व प्राचार्य से शिकायत के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी चाही, जिसमें वे संतुष्टिपूर्ण जवाब न देकर गोल मोल जवाब दिए। अधिकांश स्कूल ने फीस बढ़ाने की स्पष्ट कारण नहीं बताया। इतना ही नहीं सभी स्कूलों ने 20 से 30 फीसदी तक फीस बढ़ाई। इनका जवाब सुनकर कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिये हुये कहा कि स्कूल प्रबंधन अपनी कार्य प्रणाली सुधारे अन्यथा उनके विरूद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। शिकायत में अभिभावकों ने बिना किसी पूर्व सूचना के अप्रत्याशित रूप से फीस वृद्धि करने, एक ही स्कूल में एक ही कक्षा की अलग-अलग फीस, किसी नियत स्थल से ड्रेस व शैक्षणिक सामग्री मिलने, टीसी प्रदान नहीं करने तथा कोचिंग लेने के लिये प्रेरित करना जैसी शिकायत अभिभावकों द्वारा की गई।

 

टीसी निकालने में 50 हजार मांग रहा स्कूल

 

अभिभावक ने कलेक्टर को बताया कि टीसी निकालने के 50 हजार मांगे जा रहे हैं। वे तैयार हैं परन्तु टीसी नहीं दी जा रही है। वहीं स्कूला प्रबंधन द्वारा लगातार फीस वृद्धि की जा रही है, एक ही कक्षा में अलग-अलग फीस स्ट्रक्चर है। बच्चों के आईडी कार्ड के साथ माता-पिता का आइडी कार्ड के भी 450 रुपये फीस ली जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि इससे तो अच्छी पढ़ाई सरकारी स्कूलों में होती है। जहां इतनी परेशानी भी नहीं होती। ज्ञान गंगा स्कूल में जांच के दौरान भी कई खामियां पाई गई, जिसमें स्कूल के नाम परिवर्तन के लिए अनुमति, डाइसकोर्ड व नवीन मान्यता आदि के नहीं होने पर वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। अभिभावकों ने बताया कि ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल में नर्सरी के बच्चों के ड्रेस भी 13-13 हजार रुपये में बैंगलोर से आते है।

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