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इंदौर। नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों के भुगतान के मामले में सहायक ऑडिटर विक्रम वर्मा, कंप्यूटर ऑपरेटर जगदीश चौकसे और लेखा विभाग में आवक-जावक का काम देखने वाले मुरलीधरन के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। निगमायुक्त द्वारा बनाई गई समिति की जांच रिपोर्ट में घोटाले में इन तीनों की भी संलिप्तता पाई गई है। यह बात भी सामने आई है कि आरोपित फर्जी बिल मार्च में ही पेश करते थे, ताकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने की हड़बड़ी में वे आसानी से फर्जीवाड़े को अंजाम दे सके और इस पर किसी की नजर भी न पड़े।

निगमायुक्त द्वारा बनाई गई समिति ने शुक्रवार देर रात अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंप दी थी। समिति ने 188 फाइलों की जांच की और इसमें 150 से ज्यादा फाइलों में फर्जीवाड़ा मिला है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब 107 करोड़ रुपये के बिल पेश किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से 81 करोड़ रुपये का भुगतान किया भी जा चुका है। यानी नगर निगम के खाते से बगैर काम ही इतनी बड़ी रकम घोटालेबाजों के खाते में ट्रांसफर हो चुकी है।

समिति ने जांच में यह भी पाया है कि फर्जीवाड़े को अंजाम देने में अब तक ठेकेदार फर्मों और निगम कर्मियों, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अभय राठौर की भूमिका सामने आई है। इसके अलावा ऑडिट शाखा के सहायक आडिटर विक्रम वर्मा, कंप्यूटर ऑपरेटर जगदीश चौकसे और लेखा शाखा के मुरलीधर की भूमिका रही है। अब निगम इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगा।

 

जमीनों में किया है निवेश

 

इधर यह जानकारी भी सामने आई है कि आरोपियों ने फर्जीवाड़े की ज्यादातर राशि जमीनों में निवेश की है। नगर निगम अब इन जमीनों की जानकारी निकालेगा। निगम के अधिकारियों ने कानूनी विशेषज्ञों से इस बात को लेकर चर्चा भी शुरू कर दी है कि फर्जीवाड़े की वसूली कैसे की जा सकती है।

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