Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Nomadic Elephant 2026: पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, रूम इंटरवेंशन और बोख कुश... Yogi Adityanath Delhi Visit: पीएम मोदी और जेपी नड्डा से मिले सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी चुनाव और संगठ... सोशल मीडिया पर दिखावा पड़ा भारी: यूट्यूबर मधुमिता के घर से ₹1 करोड़ के सोने-हीरे के जेवर चोरी Delhi Festive Preparations: रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पर्व के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई 3 विशेष समित... वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई बेहद आसान: अब दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति, घर आएंगे BLO मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गरमाई सियासत: राहुल गांधी ने साझा किया जिजी थॉमसन का दावा UKSSSC VPDO Scam: 2016 भर्ती घोटाले में हरीश रावत से ईडी ने किए सवाल-जवाब, कांग्रेस ने बताया बदले की... Sambhal News: आचार्य प्रमोद कृष्णम को बब्बर खालसा से जुड़ी धमकी, विदेशी नंबर से ऑडियो कॉल; गृह मंत्र... Roorkee News Today: रुड़की में दोहरे हत्याकांड से सनसनी, गांव में भारी पुलिस बल तैनात; एसएसपी बोले- ... Election Commission Reforms: चुनाव आयोग में पारदर्शिता की नई पहल, SIR प्रोसेस, ECINet और अधिकारियों ...

डेढ़ करोड़ की ग्रांट जिस कोर्स को चलाने मिली उस पर पैरामेडिकल काउंसिल का अड़ंगा

32

जबलपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मिले डेढ़ करोड़ रुपये का अनुदान विश्वविद्यालय के लिए भारी पड़ गया है। लैब टेक्नोलाजी के जिस पाठ्यक्रम के लिए यूजीसी ने ग्रांट मंजूर की थी उस पर अब पैरामेडिकल काउंसिल ने अड़ंगा लगा दिया है। दरअसल, 2015 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रोजेक्ट के तौर पर विवि में दो वोकेशनल कोर्स शुरू कराए गए।

कोर्स में प्रवेश हासिल कर चुके छात्रों की परेशानी बढ़ गई

लैब टेक्नाेलॉजी को लेकर मप्र पैरामेडिकल काउंसिल ने कहा है कि यह पूर्व निर्धारित कोर्सेस में है ही नहीं। इससे कोर्स में प्रवेश हासिल कर चुके छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। विवि प्रशासन भी असमंजस में है कि वह यूजीसी की माने या फिर पैरामेडिकल काउंसिल की। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और पैरामेडिकल काउंसिल के अलग-अलग नजरिए से छात्र खासे परेशान हैं। बड़ी संख्या में छात्र दाखिला ले चुके हैं लिहाजा भविष्य को लेकर भी कशमकश की स्थिति बनने लगी है।

असमंजस में विद्यार्थी

-रादुवि में चल रहे वोकेशनल पाठ्यक्रम मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी कोर्स को केंद्र सरकार द्वारा निकाली जा रही नौकरियों के लिए पात्र है जबकि मप्र में इसे मान्यता नहीं दी गई है।

– मप्र में निकलने वाली नौकरी में पैरामेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम की शर्त रख दी जाती है। ऐसे में छात्र भ्रमित हैं कि एक ही कोर्स को लेकर अलग-अलग मापदंड क्यों हैं?

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.