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रामलला की आंखों से पट्टी खोली, 121 प्रकांड विद्वानो ने अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न की

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अयोध्या में नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए। शुभ समारोह में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री दिन में ही अयोध्या पहुंचे। प्रधानमंत्री लाल मुड़े हुए दुपट्टे पर चांदी की ‘छतर’ (छाता) रखकर मंदिर परिसर के अंदर गए। पीएम मोदी ने एक ट्वीट में कहा, “अयोध्या धाम में श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का दिव्य क्षण हर किसी के लिए भावनात्मक क्षण है। इस अनूठे कार्यक्रम का हिस्सा बनना मेरा सौभाग्य है। जय सियाराम।”

वैदिक आचार्य सुनील शास्त्री की अगुवाई में 121 प्रकांड विद्वानो ने संजीवनी योग में मंत्रोच्चार के बीच प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को पूर्ण कराया। अभिजीत मुहुर्त में दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 84 सेकेंड के अंतराल में श्याम वर्ण भगवान के बाल विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके बाद पीएम ने ही रामलला के आंख से पट्टी खोली और हाथ में कमल का फूल लेकर पूजन किया। रामलला पीतांबर से सुशोभित हैं। उन्होंने हाथों में धनुष-बाण धारण किया है। इसके साथ आसमान से हेलीकाप्टर के जरिये मंदिर प्रांगढ में पुष्प वर्षा की गयी।

भव्य मंदिर में समारोह के लिए 8,000 से अधिक मेहमानों को आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री इस विशिष्ट सभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण से जुड़े श्रमजीवियों से संवाद करेंगे। वह कुबेर टीला भी जाएंगे, जहां भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। और इस पीएम मोदी के हेलीकॉप्टर से शूट किया गया है। इस वीडियो में आसमान से राम मंदिर नजर आ रहा है.

भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण 
भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया गया है। इसकी लंबाई (पूर्व-पश्चिम) 380 फीट है; चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है; और यह कुल 392 स्तंभों और 44 दरवाजों द्वारा समर्थित है। मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं और देवियों के जटिल चित्रण प्रदर्शित हैं। भूतल पर मुख्य गर्भगृह में भगवान श्री राम के बचपन के स्वरूप (श्री रामलला की मूर्ति) को रखा गया है।

 मंदिर में कुल पाँच मंडप है
मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्वी दिशा में स्थित है, जहाँ सिंह द्वार के माध्यम से 32 सीढ़ियाँ चढ़कर पहुंचा जा सकता है। मंदिर में कुल पाँच मंडप (हॉल) हैं – नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप। मंदिर के पास एक ऐतिहासिक कुआँ (सीता कूप) है, जो प्राचीन काल का है। मंदिर परिसर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में, कुबेर टीला में, भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है, साथ ही जटायु की एक मूर्ति भी स्थापित की गई है।

मंदिर का निर्माण देश की पारंपरिक और स्वदेशी तकनीक से किया गया
मंदिर की नींव का निर्माण रोलर-कॉम्पैक्ट कंक्रीट (आरसीसी) की 14 मीटर मोटी परत से किया गया है, जो इसे कृत्रिम चट्टान का रूप देता है। मंदिर में कहीं भी लोहे का प्रयोग नहीं किया गया है। जमीन की नमी से सुरक्षा के लिए ग्रेनाइट का उपयोग करके 21 फुट ऊंचे चबूतरे का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में एक सीवेज उपचार संयंत्र, जल उपचार संयंत्र, अग्नि सुरक्षा के लिए जल आपूर्ति और एक स्वतंत्र बिजली स्टेशन है। मंदिर का निर्माण देश की पारंपरिक और स्वदेशी तकनीक से किया गया है।

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