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कयामत के बाद जब कुछ न होगा तब सिर्फ यह होगा

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एक बार खलीफा उमर भाषण दे रहे थे। उन्होंने लोगों से पूछा, ‘अगर में आप लोगों को कोई आज्ञा दूं तो क्या आप सभी उसे मानेंगे?’ एक महिला ने कहा, ‘जी नहीं, हम कैसे मान सकते हैं?’

तब खलीफा उमर ने पूछा, ‘क्यों?’ महिला बोली, ‘आप इतना लंबा चोगा पहने हुए हैं लेकिन मेरे पति का चोगा घुटनों तक भी नहीं आता है। इससे साफ जाहिर होता है कि आपने शाही भंडार से अपने हिस्से में अधिक कपड़ा लिया है।’

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महिला की बात सुनकर खलीफा उमर ने कहा, ‘मैं नही जानता कि यह कैसे हुआ?’ मेरा लड़का इसका जवाब देगा।’ खलीफा उमर के संकेत पर लड़का आगे आया। उसने कहा, ‘मेरे पिता ने शाही भंडार से अधिक कपड़ा नहीं लिया है। मैनें अपने हिस्से के कपड़ा इन्हें दिया है। तभी इनका चोगा इतना लंबा हो गया।’

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लोगों का सिर श्रद्धा से खलीफा की ओर झुक गया। लेकिन महिला डर के कारण कांपने लगी। उसे डर था कि खलीफा उसे सजा देंगे। लेकिन खलीफा उस महिला पर नाराज नहीं हुए। लेकिन खलीफा ने कहा, जब तक इस महिला की तरह निर्भय होकर सत्य बात कहने वाले लोग इस दुनिया में उपस्थित हैं। तब तक हमारे धर्म को कोई खतरा नहीं है।

संक्षेप में

यानी बुजदिल कायरों वाला समाज कभी भी उन्नति नहीं कर पाता हर तरह की प्रगति तभी हो सकती है जब निर्भीकता पूर्वक सत्य कहने वाले लोग समाज में शीर्ष भूमिका निभाते हैं। कहा भी गया है ‘कयामत के बावजूद इस दुनिया में अगर कुछ कायम है तो वो होगा ‘सत्य’।’

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