Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Maihar Golamath Temple: मैहर का वो अनोखा मंदिर जहाँ नहीं है एक भी जोड़, महाशिवरात्रि पर उमड़ा श्रद्ध... Viral Wedding: सोशल मीडिया पर परवान चढ़ा प्यार, 3.8 फीट की दुल्हन और 4.2 फीट के दूल्हे की बनी 'परफेक्... Mahashivratri 2026: दूल्हा बनकर निकले पातालेश्वर महादेव, माता पार्वती संग रचाया ब्याह; बारात में जमक... Indian Currency Update: अब भारतीय सिक्के पर दिखेगी 'वंदे भारत' ट्रेन, सरकार ने जारी किया 100 रुपये क... Mahakaleshwar Temple Decoration: 4 देशों के फूलों से महका महाकाल का दरबार, बेंगलुरु के 200 कलाकारों ... Ujjain Mahakal Darshan: महाशिवरात्रि पर 44 घंटे खुले रहेंगे बाबा महाकाल के पट, भस्म आरती में दिखा अद... Indian Navy Rescue: भारतीय नौसेना ने बीच समंदर में जापानी नाविक को किया एयरलिफ्ट, 200 किमी दूर से ऐस... Delhi EOL Vehicle News: दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', अब बिना नोटिस सीधे स्क्रैप... UP Politics: पूर्व मंत्री अनीस खान समेत 100 से ज्यादा दिग्गज आज थामेंगे सपा का दामन, अखिलेश यादव की ... Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद में रिश्तों का कत्ल, ढाई साल की बेटी से अश्लील हरकत करते पिता को मां...

कालाष्टमी 4 दिसंबर को, जानें क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त और पौराणिक महत्व

13

इंदौर। हिंदू धर्म में काला अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। इस तिथि पर भगवान शिव के भैरव रूप की आराधना की जाती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, काला अष्टमी हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान मनाई जाती है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं। खास बात ये है कि कालाष्टमी या कालभैरव जयंती उत्तर भारत में जहां मार्गशीर्ष माह में महीने में मनाई जाती है, वहीं दक्षिण भारतीय इसे कार्तिक माह में मनाया जाता है। शिव भक्तों का मानना ​​है कि इसी दिन भगवान शिव भैरव रूप में प्रकट हुए थे। पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, इस साल कालाष्टमी व्रत 8 दिसंबर को रखा जाएगा।

ऐसे हुए भैरव नाम की उत्पत्ति

भैरव शब्द ‘भृ’ से बना है, जिसका अर्थ है वह जो ब्रह्मांड को धारण और पोषण करके धारण करता है, जबकि ‘राव’ शब्द का अर्थ है आत्म-जागरूकता। काल भैरव शब्द के बारे में सबसे पहले उल्लेख शिव महापुराण में मिलता है। इसको लेकर एक पौराणिक कथा का भी जिक्र मिलता है। जिसमें बतया गया है कि एक बार भगवान ब्रह्मा अहंकारी हो गए और भगवान विष्णु के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह सर्वोच्च निर्माता हैं और वे सब कुछ कर सकते हैं, जो भगवान शिव कर सकते हैं और इसलिए उनकी पूजा की जानी चाहिए, न कि भगवान शिव की पूजा की जानी चाहिए।

भगवान ब्रह्मा के अहंकार को कुचलने के लिए भगवान शिव ने अपने बालों का एक गुच्छा लिया और उसे फर्श पर फेंक दिया और उससे भगवान काल भैरव प्रकट हुए, जिन्होंने भगवान ब्रह्मा के पांचवें सिर को काट दिया। ऐसे में भगवान ब्रह्मा को अपनी गलती का अहसास हो गया और उन्होंने भगवान शिव से माफी मांग ली। लेकिन साथ ही भगवान काल भैरव को ब्रह्म-हत्या के पाप का श्राप मिला और वे काशी पहुंचने तक भगवान ब्रह्मा के कटे हुए पांचवें सिर के साथ घूमते रहे। वहां उन्हें पाप से मुक्ति मिल गई और इस तरह वे वहीं रहने लगे। यहीं कारण है कि भगवान कालभैरव को ‘काशी का कोतवाल’ भी कहा जाता है।

8 दिसंबर को ऐसे करें कालाष्टमी पूजा

  • सुबह उठकर स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
  • काले रंग का वस्त्र धारण करें व्रत करने का संकल्प लें।
  • काल भैरव की मूर्ति या तस्वीर के सामने धूप, दीपक, अगरबत्ती जलाएं।
  • दही, बेलपत्र, पंचामृत, धतूरा, पुष्प आदि अर्पित करें।
  • काल भैरव के मंत्रों का जाप करते रहें।
  • पूजा के बाद आरती करें और आशीर्वाद लें।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.