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Sankashti Chaturthi 2023: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कल, जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ, प्रसन्न होंगे बप्पा

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विक्षिप्तं च तथैकाग्रं निरोधं भूमिसज्ञकम् ॥

तत्र प्रकाशकर्ताऽसौ चिन्तामणिहृदि स्थितः ।

साक्षाद्योगेश योगेज्ञैर्लभ्यते भूमिनाशनात् ॥

चित्तरूपा स्वयंबुद्धिश्चित्तभ्रान्तिकरी मता ।

सिद्धिर्माया गणेशस्य मायाखेलक उच्यते ॥

अतो गणेशमन्त्रेण गणेशं भज पुत्रक ।

तेन त्वं ब्रह्मभूतस्तं शन्तियोगमवापस्यसि ॥

इत्युक्त्वा गणराजस्य ददौ मन्त्रं तथारुणिः ।

एकाक्षरं स्वपुत्राय ध्यनादिभ्यः सुसंयुतम् ॥

तेन तं साधयति स्म गणेशं सर्वसिद्धिदम् ।

क्रमेण शान्तिमापन्नो योगिवन्द्योऽभवत्ततः ॥

संकट नाशन स्तोत्र

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।

भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुः कामार्थसिद्धये ।।

प्रथमं वक्रतुडं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।

तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।।

लम्बोदरं पंचमं च षष्ठ विकटमेव च ।

सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।।

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।

एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।

न च विध्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं परम् ।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।

जपेग्दणपतिस्तोत्रं षड् भिर्मासैः फ़लं लभेत् ।

संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ।।

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।

तस्य विद्या भवेत् सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ।।

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

मंत्र

श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥

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