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चुनाव के फेर में जनसुनवाई बंद, पुरानी शिकायतें नहीं निपटीं, नई का लगा अंबार

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जबलपुर। चुनाव आचार संहिता के कारण नगर निगम सहित अन्य शासकीय दफ्तरों में होने वाली जनसुनवाई बंद है। आचार संहिता लगने से पूर्व नगर निगम में जनसुनवाई में की गई शिकायतों की समीक्षा की गई तो पता चला कि विभागीय अधिकारी इनके निराकरण में ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर निगम के अतिक्रमण शाखा से जुड़ी सर्वाधिक 595 शिकायतें अब भी लंबित हैं।

निराकरण न करने में दूसरे स्थान पर नगर निगम का भवन शाखा

जनसुनवाई में आई शिकायतों का निराकरण न करने में दूसरे स्थान पर नगर निगम का भवन शाखा है। भवन में भवन निर्माण की अनुमति, अवैध निर्माण की 225 शिकायतें लंबित हैं। इसी तरह 21 विभागों की 1043 शिकायतें लंबित हैं जो नागरिकों ने जनसुनवाई में की थीं। वहीं पुरानी शिकायतों का निराकरण हो रहा इधर चुनाव के बाद नई शिकायतें भी पहुंचने लगी है। इन दिनों नगर निगमें नई-पुरानी शिकातयों का अंबार लग गया है। विदित हो कि नगर निगम में हर मंगलवार को जनसुनवाई होती है जिसमें अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी बैठते हैं। जबलपुर सहित प्रदेश भर के सरकारी कार्यालयों में जनसुनवाई वर्ष 2009-10 में शुरू हुई थी।

एक ही शिकायत बार-बार पहुंच रही

नगर निगम में की जाने वाली जनसुनवाई के हाल ये है कि जनसुनवाई करने वाले अधिकारी शिकातयों को मूल विभाग में प्रेषित कर इतिश्री कर लेते हैं जबकि जिस विभाग से जुड़ी शिकायत हैं वहां के विभागीय अधिकारी उन शिकायतों को निराकृत करने में रूचि नहीं दिखाते। नगर निगम में कुछ ऐसी भी शिकायतें पहुंच रही है जो 10 से 15 बार की जा चुकी है। इनमें कुछ पीएम आवास योजना की किश्त न मिलने की तो कुछ लेमा गार्डन में पात्र हितग्राहियों को अावंटित आवास का कब्जा दिलाने की। इसी तरह अतिक्रमण हटाने, पानी न मिलने की ढेरों शिकायतें हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में लगातार पहुंच रही हैं।

सिर्फ सीएम हेल्पलाइन पर जोर

नगर निगम का पूरा जोर सीएम हेल्पलाइन में आई शिकायतों के निराकरण करने में रहता है। सीएम हेल्पलाइन की गई शिकायतों का निराकरण येन-केन, प्रकारेण कर नगर निगम प्रदेश भर में ‘ए प्लस ; ग्रेडिंग वाह वाही तो लूट रहा, लेकिन जो शिकायतकर्ता व्यक्तिगत रूप से जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं उनका निराकरण करने में अधिकारी हीलाहवाली कर रहे हैं।

प्रमुख विभागों में लंबित जनसुनवाई में की शिकायतों के हाल-

  • विभाग – लंबित शिकायत
  • अतिक्रमण शाखा – 595
  • भवन शाखा – 225
  • पीडब्ल्यूडी – 72
  • जल विभाग – 25
  • उद्यान विभाग – 23
  • संपदा शाखा – 14
  • पीएमएवाय – 12

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