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जबलपुर में तो बेरोजगारों की भी मन रही ‘चुनावी’ दीवाली

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जबलपुर। विधानसभा चुनाव की रंगत अब गाढ़ी हो चली है। 17 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए प्रत्याशियों ने भी जोर लगाना शुरू कर दिया है। प्रत्याशी ढोल-ढमाके और भीड़ के साथ मतदाताओं के घर-घर जाकर शीश झुकाकर जीत का आशीर्वाद मांग रहे हैं। जहां प्रत्याशी नहीं पंहुच पा रहे वहां उनके समर्थक किराये की भीड़ लेकर प्रत्याशी के नाम का वोट मांगते नजर आ रहे हैं।

न सिर्फ युवा बल्कि बुर्जुग और क्षेत्र की गरीब महिलाएं भी शामिल

पूर्व विधानसभा क्षेत्र में जब चुनावी महौल देखने निकले तो पता चला चुनावी महौल में लोगाें को घर बैठे रोजगार मिल रहा है। न सिर्फ युवा बल्कि बुर्जुग और क्षेत्र की गरीब महिलाएं भी अपना कामकाज निपटा कर चुनाव भीड़ का हिस्सा बन रही हैं। काम सिर्फ पार्टी और प्रत्याशी का झंडा लेकर चलने का है। बदले में इन्हें नाश्ता, भोजन सहित शाम को मेहनताना भी मिल रहा है। यानी चुनाव में गरीब वर्ग की दीवाली भी अच्छे से मन रही है।

रेहड़ी वाले को रोका बोले चलो साथ में

घमापुर से होकर जब प्रेमसागर की तरफ मुड़े तो देखा कि एक प्रत्याशी का प्रचार करती भीड़ ढोल-ढमाकों के चली आ रही है। जिसमें न सिर्फ नेता बल्कि आस-पास के मोहल्लों के युवा, महिलाएं यहां तक बच्चे भी हाथों में पार्टी के झंडे, झंडे औ तख्ती लिए दिखे। प्रेमसागर चौराहे पर एक रेहड़ी वाला अपनी पुरानी लूना से रोजाना की तरह सामान बेचने निकला था। जिसे कुछ लोगों ने रोक लिया, बातचीत से ऐसा लगा कि वे उसके परिचित के थे उनमें से एक ने कहा कि कहां जा रहे हैं? गाड़ी यहीं खड़ी करो और हमारे साथ चलो दिन भर की कमाई निकल आएगी।

काफी देर तक वे उसे मनाने की कोशिश करते रहे लेकिन युवक तैयार नहीं हुआ और लूना लेकर आगे बढ़ गया। चुनाव करने वाली भीड़ राधाकृष्णन वार्ड के गेट से भीतर घुस गई। वहां खड़े कुछ लोगाें ने कहा कि क्या जमाना है प्रचार के लिए स्वेच्छा से भीड़ भी नहीं जुट रही। इसी रह थोड़ा आगे चलने पर करिया पाथर शमशान घाट की तरफ जाने वाले मार्ग पर कुछ महिलाएं घरों से निकलते हुए कहते हुए दिखी दीदी जल्दी चलो रैली आगे निकल गई, हम नहीं दिखेंगे तो भैया नाराज होंगे।

मकानों में लहरा रहे झंडे

अनुसूचित जाति बहुल्य क्षेत्र पूर्व विधानसभा में अधिकांश घर प्रत्याशियों के चुनाव चिंह वाले डंडे-झंडों से पाट दिए गए हैं। राधाकृष्णन, आचार्य विनोभा भावे, शीतलामाई, द्वारका नगर,सेठ गाेविंदास वार्ड सहित अन्य वार्डों में ज्यादातर घरों में मुख्य रूप से दोनों की प्रमुख पार्टियों के झंडे काे देखकर मानो ऐसा लगा कि हर बार की तरह इस बार भी मतदाताओं का झुकाव किसी पार्टी या प्रत्याशी विशेष की तरफ नहीं है। कुछ लोगों ने चर्चा में किसी एक प्रत्याशी की तारीफ करते दिखे तो अगले वार्ड में दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में रूझान समझ आया। रद्दीचौकी तरफ कुछ क्षेत्रों में दोनों पार्टियों का और भीतर की तरफ जाने पर एक पार्टी विशेष का जोर नजर आया।

जनता के मन में क्या कोई जाने न

शहर की चारों विधानसभा क्षेत्रों में पूर्व विधानसभा अभी पिछड़ेपन का दंश झेल रही है। पिछले 20 वर्षों से क्षेत्र में विकास की बयार नहीं बह पा रही मतदाताअों का मूड भी हर चुनाव में बदल रहा है। पिछले तीन चुनाव परिणामों पर नजर डाले कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा। दाेनों ही पार्टियों में कांटे की टक्कर रही। यहां मतदाताओं का मूड तय कर रहा है कि किसे अपना विधायक चुना जाए। क्योंकि पूर्व विधानसभा क्षेत्र में अनूसचित जाति वर्ग के सर्वाधिक मतदाता है वहीं मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र भी है।ज्यादातर लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यावन करने वाले है। यहीं मतदाता कभी मतदाता बीजेपी के पक्ष में चले जाते है कि तो कभी कांग्रेस के पक्ष में। ऐसा नही है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने से कांग्रेस को ही फायदा मिले क्योंकि कई बार बीजेपी ने भी अच्छी बढ़त के साथ जीत दर्ज की है। फिलहाल मतदाताओं के मन में क्या है कोई नहीं जान पा रहा।

विकास और नशे का अवैध कारोबार अहम मुद्दे

पूर्व विधानसभा क्षेत्र में विकास तो अहम मुद्दा है ही नशे का अवैध कारोबार भी खास मुद्दे में शामिल है। शहर के सभी चौराहे सुंदर व व्यवस्थित हो गए लेकिन एक घमापुर चौराहा जो आज भी जैसे का तैसा है। आज तक चौराहे का विकास नहीें हो पाया। राजनीतिक विरोध के कारण चौराहा चौड़ा नहीं हो पा रहा है। यहां रोजाना ही शाम को इतना भीषण जाम लगता है कि लोग कराह उठते हैं। यहां फ्लाई ओवर बनाने की बात उठी पर राजनीतिक खींचतान और अंड़गेबाजी से फ्लाईओवर का सपना साकार नहीं हो पा रहा है।

गांजा से लेकर स्मैक और अवैध शराब का कारोबार फलफूल रहा है। दंगल मैदान, कछियाना, सिद्धबाबा में जुआ सट्टा भी खिलाया जाता है। पहले के मुकाबले नशे के अवैध कारोबार में अंकुश लगा है। युवाओं का रूझान जुआ-सट्टा, शराब की तरफ अधिक है। इन्हें राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है ये उनके फेवर में खड़े हो जाते हैं।

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