Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

BJP की पहली लिस्ट में आलाकमान तो दूसरी में वसुंधरा राजे का दिखा दमखम, कांग्रेस में काम नहीं आया सर्वे

105

जयपुर।  राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने प्रत्याशियों की दो-दो सूची जारी की है। कुल दो सौ सीटों में से भाजपा अब तक 124 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। वहीं, कांग्रेस ने 76 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है।

आलाकमान की मर्जी से बनी पहली सूची

भाजपा की पहली सूची पूरी तरह से पार्टी आलाकमान की मर्जी से बनी, जिसमें 41 में से 13 प्रत्याशियों का विरोध पिछले 16 दिन से जारी है। वहीं, दूसरी सूची में पहली सूची जारी होने के बाद उठे विरोध के स्वर को शांत करने की कोशिश की गई। प्रदेश के सभी बड़े नेताओं को टिकट और महत्व देकर विरोध के स्वर थामने का प्रयास हुआ।

दूसरी सूची में वसुंधरा राजे को साधने की कोशिश

दूसरी सूची में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को साधने का पूरा प्रयास किया गया है। उनके समर्थकों को महत्व देकर संदेश देने की कोशिश की गई कि वसुंधरा अभी सीएम पद की दौड़ से बाहर नहीं हुई है। ऐसा करने से सबसे मजबूत वसुंधरा खेमा पार्टी को जीत दिलवाने में जुटा रहेगा।

दूसरी सूची में सांसदों को नहीं दिया गया टिकट

पहली सूची में सात सांसदों को टिकट देने से पार्टी नेताओं में नाराजगी बढ़ी तो दूसरी सूची में एक भी सांसद को टिकट नहीं दिया गया। भाजपा ने पहली सूची में सर्वे के आधार पर नाम तय किए थे, जिससे होने वाले संभावित नुकसान को भांप कर भाजपा आलाकमान ने दूसरी सूची पूरी तरह से प्रदेश के नेताओं की सलाह से तैयार की।

आलाकमान की ओर से करवाए गए सर्वे में जिन 17 विधायकों की स्थिति खराब बताई गई थी, उन्हें पार्टी ने फिर से मैदान में उतारा है। कांग्रेस के प्रत्याशी तय करने में आलाकमान की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट भी काम नहीं आई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मिलकर अपने-अपने समर्थकों को टिकट बांट दिए।

कांग्रेस की सूची में न गाइडलाइन काम आया, न ही सर्वे

उधर, कांग्रेस की दोनों सूचियों को देखकर लगता है कि आलाकमान द्वारा एक साल पहले तय की गई गाइडलाइन कोई काम नहीं आई। सर्वे भी कोई काम नहीं आया। पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए लगातार दो चुनाव हारने वाले दो उम्मीदवारों को टिकट दिया गया। साथ ही 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों की हार का कारण बने पांच निर्दलीय विधायकों को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे दो मंत्रियों को टिकट दिया गया।

भाजपा में अब तक जारी है विरोध

भाजपा की पहली सूची में तिजारा, बानसूर, सांचौर, झोटवाड़ा, बस्सी, देवली-उनियारा, किशनगढ़, नगर, कोटपुटली, केकडी, अलवर शहर के प्रत्याशियों का विरोध पिछले 15 दिन से जारी है। दो दिन पहले जारी की गई सूची में चित्तौड़गढ़, सुरसागर, राजसमंद, ब्यावर एवं सांगानेर सीट से घोषित प्रत्याशियों का पार्टी कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं।

भाजपा की दोनों सूचियां देखकर कहा जा सकता है कि साल 2003 से 2018 तक के विधानसभा चुनाव में जिस तरह से वसुंधरा ने अपनी पसंद के नेताओं को टिकट दिए थे। वैसी तो उनकी नहीं चली, लेकिन फिर भी उनका प्रभाव अन्य नेताओं से अधिक नजर आ रहा है। प्रतिपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़ अपनी मौजूदा सीट चूरू बदलकर तारानगर से टिकट लेने में सफल रहे।

कांग्रेस की यह थी गाइडलाइन

कांग्रेस ने उदयपुर चिंतन शिविर सहित विभिन्न बैठकों में गाइडलाइन तय की थी । इसके तहत लगातार दो चुनाव हारने वालों को टिकट नहीं देंगे, लेकिन दो टिकट दिए गए। पार्टी ने तय किया था कि पिछले चुनाव में पार्टी की हार का कारण बने बागियों को टिकट नहीं देंगे, लेकिन गहलोत के दबाव में पांच निर्दलीय विधायकों को टिकट दिया गया। अब तक 13 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए गए, जबकि 33 प्रतिशत देने का वादा किया गया था।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.