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इंदौर में बढ़ रही वैरीकोस वैंस की बीमारी, क्या आप भी घंटों बैठे रहते हैं

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इंदौर में लोगों के पास जैसे-जैसे पैसा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे बीमारियां भी शरीर में घर करती जा रही हैं। एक बीमारी ऐसी है, जो अब इंदौर में लगातार बढ़ रही है। यह है वैरीकोस वैंस अर्थात पांवों की नसों के अप्रत्याशित ढंग से फूलने, उनमें से रक्त का रिसाव होने और असहनीय दर्द होने की बीमारी। दरअसल, इंदौर में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या हैं, जो दिनभर बैठकर कंप्यूटर या दुकान पर काम करते हैं या आफिस की गादी पर बैठे रहते हैं या फिर पूरे दिन खड़े-खड़े ही काम करते हैं। इन स्थितियों में पांव की नसों में उचित रक्त संचालन नहीं होता। नतीजतन, पांव की नसों में सड़ाव होने लगता है। इससे कभी नसें फूल जाती हैं, तो कभी चमड़ी के बाहर उभरकर दिखने लगती हैं। इंदौर में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

सुदीप कुमार वर्मा एक साफ्टवेयर कंपनी में हैं और उन्हें प्रतिदिन करीब आठ से 10 घंटों तक कुर्सी पर एक ही पोजिशन में बैठकर काम करना पड़ता है। ऐसा वे बीते करीब 12 वर्षों से कर रहे हैं। नतीजतन उनके पांव पूरे समय कुर्सी से नीचे की ओर लटके रहते हैं और उनमें रक्त का संचरण नहीं हो पाता। इस कारण सुदीप के पांव में पहले दर्द रहने लगा, फिर नसें फूलने लगीं। उन्होंने पहले इन्हें सामान्य समझा, लेकिन जब दर्द बढ़ता गया तो वे डाक्टर के पास पहुंचे।

डाक्टर ने जब उन्हें बताया कि यह तो वैरिकोस वैंस की बीमारी है, तब उन्होंने पहली बार इसका नाम सुना। अब वे उपचार ले रहे हैं, लेकिन उनके पांव पहले जैसे नहीं रहे। इन्हीं की तरह रानीपुरा क्षेत्र के एक व्यापारी भी हैं, जो पूरे दिन अपनी दुकान पर 10 से 12 घंटे केवल और केवल बैठे रहते हैं। नतीजतन, उनके पांवों में भी रक्त संचरण नहीं होता और नसें फूल गई हैं। अब वे भी अपने पांव की नसों में हुए वैरिकोस वैंस का उपचार करवा रहे हैं।
ये दो केस उन सैकड़ों मरीजों में से हैं, जो इन दिनों वैरिकोस वैंस की बीमारी से ग्रसित हैं। दरअसल, इंदौर में यह बीमारी लगातार बढ़ रही है क्योंकि लोगों की जीवनशैली में लगातार बैठकर काम करने का चलन बढ़ रहा है। कई बार यह रोग इस हद तक बढ़ जाता है कि आपरेशन ही एकमात्र उपाय बचता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई लोगों को इस बीमारी के बारे में पता भी नहीं होता। वे इसे घाव समझकर इलाज करवाते हैं। इसके बाद जब सही बीमारी के बारें में पता चलता है तो डाक्टर के पास आते हैं।

ऐसे पहचानें बीमारी

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैरिकोस वैंस सूजी हुई, मुड़ी हुई नसें होती हैं, जो त्वचा की सतह के ठीक नीचे उभर आती हैं। नीले या बैंगनी रंग की नसों का यह उभार आमतौर पर पैरों में दिखाई देता है। कई बार इनमें दर्द या खुजली भी होती है। समय के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है और मकड़जाल का रूप लेने लगती है। यदि समय रहते उपचार न किया जाए तो यह संकट बढ़ता जाता है। अत: यदि आपको पांव में जरा भी नीली या बैंगनी रंग की नसों का उभार दिखे, तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं।

ये हैं इसके लक्षण

  • नसें सख्त हो जाती हैं।
  • पैरों में जलन बनी रहती है।
  • वैरिकोज वैंस के आसपास सूजन होता है।
  • पैरों की नसों में खुजली महसूस होती है।
  • पांवों में पूरे समय भारीपन रहता है।
  • नसें गहरे नीले या बैंगनी रंग की हो जाती हैं।

ऐसे करें बचाव

  • यदि दिनभर खड़े रहने का काम है, तो प्रत्येक एक घंटे बाद 10-15 तक अवश्य बैठें।
  • वजन बढ़ने के कारण यह बीमारी होती है, इसलिए वजन पर नियंत्रण रखें।
  • नसों के फूलने का मामूली घाव समझकर सामान्य ना समझें, तुरंत डाक्टर को दिखाएं।
  • सही समय पर सही उपचार जरूर करवाएं अन्यथा आपरेशन की नौबत आ सकती है।
  • धूमपान और शराब का सेवन न करें। इससे वैरिकोस वैंस होने की आशंका बढ़ जाती है।

निजी अस्पताल में खर्च डेढ़ लाख, एमवाय में निश्शुल्क

एमवाय अस्पताल में वैरीकोस वैंस बीमारी के लिए निश्शुल्क आपरेशन की सुविधा है। यहां भारत के कई राज्यों के लोग इलाज करवाने के लिए आ चुके हैं। पिछले दो वर्षों में यहां 500 से अधिक मरीजों का लेजर उपचार किया जा चुका है। डा. अरविंद घनघौरिया ने बताया कि पैरों में घाव की समस्या को लेकर मरीज आते हैं, जो बरसों तक ठीक नहीं होती। इसका सबसे बेहतर इलाज लेजर के माध्यम से होता है।

निजी अस्पतालों में इसका खर्च करीब डेढ़ लाख रुपये तक होता है, लेकिन एमवाय अस्पताल में इसके उपचार की निश्शुल्क सुविधा है। यह बीमारी पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है। यदि इससे बचाव करना है तो वजन पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

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